कैनवास पर उतर रही कृष्ण की लीलाएं, 20 नामी चित्रकारों ने संभाली तूलिका, अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले कलाकारों का वृंदावन में जमावड़ा, तीन दिन तक रंगों में साकार होगी ब्रज की कृष्ण भक्ति
वृंदावन। श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाएं अब शब्दों और भजनों तक सीमित नहीं, बल्कि देशभर के ख्याति प्राप्त चित्रकारों की तूलिका से कैनवास पर आकार ले रही हैं। जन्माष्टमी के बाद श्रीकृष्णोत्सव-2026 के अंतिम आयोजन के रूप में वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान में सोमवार से तीन दिवसीय ‘श्री कृष्ण राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर’ (श्री कृष्ण नेशनल आर्ट वर्कशॉप-2026) शुरू हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से आए 20 नामचीन चित्रकार श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण के प्रेम और ब्रज की विविध लीलाओं को अपनी विशिष्ट कला शैलियों में कैनवास पर उकेर रहे हैं। शिविर 9 सितंबर तक चलेगा।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से आयोजित शिविर का शुभारंभ परिषद के डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, गीता शोध संस्थान के निवर्तमान निदेशक प्रो. दिनेश खन्ना और डॉ. उमेश चंद्र शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र ने देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे चित्रकारों का स्वागत करते हुए शिविर का विधिवत शुभारंभ किया। इसके बाद कलाकारों को कैनवास, रंगों की किट और अन्य आवश्यक कला सामग्री उपलब्ध कराई गई।
कला के साथ भक्ति और साधना
गीता शोध संस्थान के महेश चंद्र शर्मा ने कला, भक्ति और भारतीय परंपरा में चित्रांकन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को चित्रों में उतारना केवल कलात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह भक्ति और साधना का भी माध्यम है। अलग-अलग कला परंपराओं से आए कलाकारों के माध्यम से कृष्ण की लीलाओं के विविध रूप कैनवास पर दिखाई देंगे।
16 महिला और चार पुरुष कलाकार
राष्ट्रीय स्तर के इस कला शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए 20 ख्याति प्राप्त चित्रकार हिस्सा ले रहे हैं। इनमें 16 महिला और चार पुरुष कलाकार शामिल हैं। कई प्रतिभागी देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों और कला संस्थानों में प्रोफेसर हैं। कुछ कलाकार ललित कला अकादमी, एनसीईआरटी और विभिन्न मंत्रालयों के लिए कला एवं डिजाइन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य कर चुके हैं।
देशभर से पहुंचे नामचीन चित्रकार
शिविर में पद्मश्री शांति देवी (मधुबनी), डॉ. अलका झा (इंदौर), डॉ. बंदना जोशी (नाथद्वारा), डॉ. पूनम रानी (अलीगढ़), नीतिक्षा डावर (दिल्ली), डॉ. खुशबू उपाध्याय (गाजियाबाद), सुश्री नेहा (लखनऊ), मनजीत कौर (चंडीगढ़), डॉ. अलका मनीष पाठक (सीहोर), सोमा आनंद (पटना), विनीता सिंह (पटना), विनीता शर्मा (जयपुर), कंचन प्रकाश (ग्रेटर नोएडा), सुमित्रा अहलावत (दिल्ली), सुमन डोंगरे (उज्जैन), प्रिंस राज (मेरठ), विनोद कुमार सिंह (लखनऊ), जयेश त्रिवेदी (उज्जैन) तथा ललित कला अकादमी, आगरा के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह (आगरा) शामिल हैं।
पद्मश्री शांति देवी बनीं प्रमुख आकर्षण
शिविर में पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध मधुबनी चित्रकार शांति देवी प्रमुख आकर्षण हैं। उनकी मधुबनी शैली की कला देश-विदेश में प्रदर्शित हो चुकी है। राष्ट्रपति भवन में अपनी चित्र प्रदर्शनी लगा चुकीं कंचन प्रकाश भी शिविर में भाग ले रही हैं। विभिन्न कला परंपराओं और शैलियों के इन कलाकारों के एक मंच पर आने से शिविर में भारतीय कला की विविधता भी दिखाई दे रही है।
अगले जन्म में भी चित्रकार बनना चाहेंगी शांति देवी
अपने उद्बोधन में पद्मश्री शांति देवी ने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन कला को समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि वे जीवनभर चित्रकला से जुड़ी रहना चाहती हैं और अगले जन्म में भी चित्रकार बनना चाहेंगी। उनकी कला-यात्रा और मधुबनी शैली के माध्यम से भारतीय लोककला को देश-विदेश में मिली पहचान का भी उल्लेख किया गया।
एक कृष्ण, अनेक कला शैलियां
कार्यक्रम का संचालन गीता शोध संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया। उन्होंने सभी चित्रकारों का परिचय कराया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों और कला परंपराओं से आए कलाकार जब एक ही विषय श्रीकृष्ण को अपनी दृष्टि और शैली में चित्रित करते हैं, तो भारतीय कला की विविधता और ब्रज की सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम सामने आता है।
कला और संस्कृति से जुड़े लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति के क्षेत्र से जुड़े मार्गदर्शक दीपक, रामवीर, मोहिनी कृष्णदासी, विक्रम दिवाकर, मनीष, बच्चू सिंह और सुनील सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। तीन दिन तक चलने वाले इस शिविर में कलाकार श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम, ब्रज संस्कृति और कृष्ण की विभिन्न दिव्य लीलाओं को अपनी कल्पना और कला-दृष्टि के अनुरूप कैनवास पर आकार देंगे।