यूएन के करेक्ट द मैप प्रस्ताव को भारत का समर्थन, भारत का जवाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमारा

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 'करेक्ट द मैप' नाम के प्रस्ताव पर भारत का बयान आया है। भारत ने जोर दिया कि ये प्रस्ताव किसी खास मैप, प्रोजेक्शन या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण का समर्थन नहीं करता है।

Sep 6, 2026 - 18:11
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यूएन के करेक्ट द मैप प्रस्ताव को भारत का समर्थन, भारत का जवाब, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमारा


 
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 'करेक्ट द मैप' नाम के प्रस्ताव पर भारत का बयान आया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने रविवार (6 सितंबर) को एक्स पर पोस्ट कर बताया कि इक्वल एरिया मैप प्रोजेक्शन को संतुलित करना और दुनिया के क्षेत्रों विशेषकर अफ्रीका के समान प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे पर ऐसी प्रतिक्रिया दी है, जिससे पाकिस्तान तिलमिला उठेगा।

जायसवाल ने बताया कि इसका मकसद समान-क्षेत्र वाले मैप प्रोजेक्शन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है, जो महाद्वीपीय भू-भागों के सापेक्ष आकार को बनाए रखते हैं। यह प्रस्ताव न तो किसी विशेष वैश्विक मैप को अपनाता है और न ही उसे प्रमाणित करता है और न ही यह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नामों सहित राजनीतिक मानचित्रण से संबंधित है।
 
उन्होंने बताया कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और इक्वल एरिया मैप प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के मूल सिद्धांत पर जोर देते हुए अपने वोट के बारे में स्पष्टीकरण भी दिया है। उन्होंने बताया कि भारत ने इस बात पर भी जोर दिया है कि ये प्रस्ताव किसी खास मैप, प्रोजेक्शन या राष्ट्रीय सीमाओं के चित्रण का समर्थन नहीं करता है।

भारत के संप्रभु क्षेत्र, जिसमें जम्मू-कश्मीर और केंद्र शासित लद्दाख के इलाके शामिल हैं, उन सभी को भारत के आधिकारिक मैप के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए। भारत ने ये भी स्पष्ट किया है कि कोई भी गलत या भ्रामक मैप किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमारा रुख स्पष्ट है।

इसका मकसद ऐसे विश्व नक्शों को बढ़ावा देना है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का क्षेत्रफल वास्तविक अनुपात के ज्यादा करीब दिखे. इस प्रस्ताव को 164 देशों ने समर्थन दिया, जबकि अमेरिका ने अकेले इसका विरोध किया और 6 देश वोटिंग से दूर रहे।