वृंदावन में सजेगा रंगों का आध्यात्मिक संसार, 20 नामचीन चित्रकार कैनवास पर उतारेंगे श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाएं
वृंदावन में श्री कृष्णोत्सव-2026 का समापन कला और अध्यात्म के अनूठे संगम के साथ होगा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा 7 से 9 सितंबर तक गीता शोध संस्थान में ‘श्री कृष्ण राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर’ आयोजित किया जा रहा है। इसमें पद्मश्री शांति देवी समेत देश के विभिन्न राज्यों के 20 ख्यातिप्राप्त चित्रकार हिस्सा लेंगे। कलाकार तीन दिनों तक श्रीकृष्ण, राधा-कृष्ण और ब्रज की दिव्य लीलाओं को अपनी-अपनी कला शैलियों में बड़े कैनवास पर साकार करेंगे।
श्री कृष्णोत्सव-2026 का भव्य समापन, 7 से 9 सितंबर तक गीता शोध संस्थान में राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर, पद्मश्री शांति देवी समेत देशभर के 20 कलाकार होंगे शामिल
वृंदावन। श्री कृष्णोत्सव-2026 के अंतिम आयोजन के रूप में वृंदावन की पावन धरती पर भारतीय कला और श्रीकृष्ण भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की ओर से वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान में 7, 8 और 9 सितंबर को तीन दिवसीय ‘श्री कृष्ण राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर’ (श्री कृष्ण नेशनल आर्ट वर्कशॉप-2026) का आयोजन किया जा रहा है। इस राष्ट्रीय स्तर के कला शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से आए 20 ख्यातिप्राप्त चित्रकार भगवान श्रीकृष्ण, राधा और उनकी दिव्य लीलाओं को अपनी-अपनी विशिष्ट कला शैलियों में कैनवास पर जीवंत करेंगे। शिविर का शुभारंभ सोमवार सुबह उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की सीईओ श्रीमती लक्ष्मी नागपाल, आईएएस की उपस्थिति में होगा। कार्यक्रम के संयोजक गीता शोध संस्थान के कोऑर्डिनेटर चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार हैं।
एक कैनवास, श्रीकृष्ण की अनेक कल्पनाएं
इस राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर की सबसे खास बात यह होगी कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार एक ही आध्यात्मिक विषय को अपनी अलग-अलग दृष्टि और कला शैली में प्रस्तुत करेंगे। कोई कलाकार श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को रंगों में उकेरेगा तो कोई राधा-कृष्ण के प्रेम को अपनी कला की भाषा देगा। वहीं कुछ कलाकार ब्रज की गलियों, यमुना तट, गोप-गोपियों और कृष्ण की दिव्य लीलाओं में छिपी आध्यात्मिक चेतना को कैनवास पर आकार देंगे। तीनों दिन गीता शोध संस्थान कलाकारों की सृजन साधना का केंद्र बना रहेगा। प्रत्येक चित्रकार को बड़े आकार का कैनवास, रंग और अन्य आवश्यक कला सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। कलाकार लगातार तीन दिनों तक संस्थान में उपस्थित रहकर अपनी कलाकृतियों को अंतिम रूप देंगे।
पद्मश्री शांति देवी समेत देश की दिग्गज कलाकार होंगी शामिल
राष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन में 16 महिला और चार पुरुष चित्रकार हिस्सा ले रहे हैं। इनमें पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध मधुबनी चित्रकार शांति देवी प्रमुख आकर्षण होंगी। इसके अलावा राष्ट्रपति भवन में अपनी कला प्रदर्शनी लगा चुकीं कंचन प्रकाश भी शिविर में भाग लेंगी। शिविर में शामिल कई महिला चित्रकार देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और संस्थानों के कला विभागों में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वहीं कई कलाकार ललित कला अकादमी, एनसीईआरटी और विभिन्न मंत्रालयों के लिए कला एवं डिजाइन से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी निभा चुकी हैं। कई प्रतिभागी कलाकारों की कलाकृतियां राष्ट्रपति भवन के अलावा यूरोप सहित दुनिया के कई देशों में आयोजित कला प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुकी हैं। ऐसे में वृंदावन में होने वाला यह आयोजन भारतीय चित्रकला की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान रखने वाले कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा।
ब्रज की संस्कृति और कृष्ण भक्ति को मिलेगी रंगों की नई भाषा
शिविर में तैयार होने वाली कलाकृतियां केवल चित्र नहीं होंगी, बल्कि उनमें ब्रज की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और कृष्ण भक्ति की गहरी अनुभूति दिखाई देगी। कलाकार अपनी कल्पनाशीलता के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं, राधा-कृष्ण के प्रेम, ब्रजभूमि की आध्यात्मिक चेतना और यहां की लोक परंपराओं को आधुनिक एवं पारंपरिक कला शैलियों के माध्यम से प्रस्तुत करेंगे। एक ही विषय को अलग-अलग राज्यों और कला परंपराओं से जुड़े कलाकारों द्वारा अलग नजरिए से प्रस्तुत किया जाना इस शिविर को खास बनाएगा। मधुबनी से लेकर आधुनिक चित्रांकन तक भारतीय कला की विविध शैलियां एक ही स्थान पर दिखाई देंगी।
कृष्णोत्सव का ऐसा समापन, जो वर्षों तक रहेगा याद
श्री कृष्णोत्सव-2026 के समापन अवसर पर आयोजित यह कला शिविर वृंदावन की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कला के वैश्विक मंच से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस शिविर में कैनवास पर उभरती श्रीकृष्ण की अलग-अलग छवियां न केवल कलाकारों की कल्पनाशक्ति को सामने लाएंगी, बल्कि ब्रजभूमि की आध्यात्मिक शक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि का भी संदेश देंगी। यह आयोजन महज चित्र बनाने की कार्यशाला नहीं, बल्कि वृंदावन की धरती पर श्रीकृष्ण की लीलाओं के प्रति कलाकारों की रचनात्मक साधना के रूप में देखा जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकार जब श्रीकृष्ण को अपनी-अपनी कला दृष्टि से चित्रित करेंगे, तो यह भारतीय कला की विविधता के साथ-साथ ब्रज की सांस्कृतिक एकता का भी अद्भुत उदाहरण बनेगा।
ये 20 चित्रकार लेंगे हिस्सा
श्री कृष्ण राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर में पद्मश्री शांति देवी (मधुबनी), डॉ. अलका झा (इंदौर), डॉ. बंदना जोशी (नाथद्वारा), डॉ. पूनम रानी (अलीगढ़), नीतिक्षा डावर (दिल्ली), डॉ. खुशबू उपाध्याय (गाजियाबाद), सुश्री नेहा (लखनऊ), मनजीत कौर (चंडीगढ़), डॉ. अलका मनीष पाठक (सीहोर), सोमा आनंद (पटना), विनीता सिंह (पटना), विनीता शर्मा (जयपुर), कंचन प्रकाश (ग्रेटर नोएडा), सुमित्रा अहलावत (दिल्ली), सुमन डोंगरे (उज्जैन), प्रिंस राज (मेरठ), विनोद कुमार सिंह (लखनऊ), जयेश त्रिवेदी (उज्जैन) तथा ललित कला अकादमी, आगरा के निदेशक डॉ. मनोज कुमार सिंह शामिल होंगे। इन सभी कलाकारों ने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय पहचान बनाई है और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के कला आयोजनों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
भारतीय कला और ब्रज संस्कृति का बनेगा अनूठा संगम
वृंदावन में होने वाला यह तीन दिवसीय राष्ट्रीय कला शिविर एक तरफ जहां श्रीकृष्ण की भक्ति और ब्रज की आध्यात्मिक चेतना को रंगों में अभिव्यक्त करेगा, वहीं दूसरी ओर भारतीय चित्रकला की विविध परंपराओं को एक मंच पर लाएगा। अलग-अलग प्रदेशों से आए कलाकारों की कलाकृतियों में जब श्रीकृष्ण के अलग-अलग रूप आकार लेंगे, तो वृंदावन में कला और अध्यात्म का ऐसा दृश्य सामने आएगा, जिसमें रंग कैनवास पर होंगे, लेकिन भाव ब्रज के होंगे। श्री कृष्णोत्सव-2026 के अंतिम आयोजन के रूप में यह राष्ट्रीय चित्रांकन शिविर ब्रज की कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा को देशभर में नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है।