लखनऊ छोड़ बूथ तक पहुंचो, तावड़े ने पदाधिकारियों को दिया सख्त टारगेट

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन को चुनावी मोड में ला दिया है। नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने लखनऊ में पहली बैठक में क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों को राजधानी से बाहर निकलकर विधानसभा और बूथ स्तर पर सक्रिय होने के निर्देश दिए। 2022 में हारी 57 सीटों के साथ एनडीए की 130 कमजोर सीटों की समीक्षा की जाएगी। मार्च तक पदाधिकारियों को छुट्टी नहीं देने का संदेश संगठन की चुनावी गंभीरता को दर्शाता है। सितंबर में बीएल संतोष और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के प्रस्तावित दौरों के बीच भाजपा दिसंबर तक चुनावी प्रचार और प्रबंधन का रोडमैप तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

Sep 6, 2026 - 21:10
 0
लखनऊ छोड़ बूथ तक पहुंचो, तावड़े ने पदाधिकारियों को दिया सख्त टारगेट
लखनऊ में भाजपा पदाधिकारियों के संग बैठक करते प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े।

यूपी में भाजपा का 'मिशन 2027' शुरू,  मार्च तक छुट्टी नहीं, शादी-ब्याह भी बाद में, क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों की होगी नियमित परफॉर्मेंस समीक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की तैयारी शुरू कर दी है। नए प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने आज लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों के साथ अपनी पहली अहम बैठक में साफ कर दिया कि अब संगठन के नेताओं को राजधानी में बैठकर चुनाव की रणनीति बनाने के बजाय सीधे विधानसभा क्षेत्रों और बूथों तक पहुंचना होगा। करीब छह घंटे चली बैठक में तावड़े ने संगठन के नेताओं को न केवल चुनावी एजेंडा समझाया, बल्कि उनकी जिम्मेदारियों और जवाबदेही की सीमा भी तय कर दी।

तावड़े का संदेश साफ था-अब स्वागत-सत्कार नहीं, संगठन और चुनाव की जमीन पर काम दिखाई देना चाहिए। बैठक सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई और शाम चार बजे तक चली। इसमें 46 पदाधिकारी मौजूद रहे। भाजपा के सह-प्रभारी जगदीश ईश्वरभाई पटेल भी बैठक में शामिल हुए।

'लखनऊ में दिखाई न दें, विधानसभा क्षेत्रों में नजर आएं'

तावड़े ने छह संगठनात्मक क्षेत्रों के क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों को निर्देश दिया कि वे लखनऊ में ज्यादा समय बिताने के बजाय अपने-अपने क्षेत्रों में जाएं। जिलों और मंडलों में औपचारिक स्वागत-सत्कार से दूरी बनाकर विधानसभा स्तर पर चुनावी तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया गया। उन्होंने क्षेत्रीय अध्यक्षों से कहा कि वे अपने मुख्यालयों तक सीमित न रहें। विधानसभा क्षेत्रों में जाकर बूथ स्तर की स्थिति, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं के बीच पार्टी की पकड़ का आकलन करें। खास तौर पर हर विधानसभा सीट के जातीय समीकरण, स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्ष की तैयारियों की जानकारी जुटाने को कहा गया है।

भाजपा के लिए सबसे बड़ा सवाल- 2022 की 57 हारी सीटों का हिसाब

तावड़े की बैठक में 2022 के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन को भी रणनीति के केंद्र में रखा गया। भाजपा ने 2017 में 312 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, लेकिन 2022 में यह आंकड़ा घटकर 255 रह गया। यानी पिछली बार पार्टी को 57 सीटों का नुकसान हुआ था। ऐसे में संगठन के सामने बड़ा सवाल यही है कि इन सीटों पर भाजपा क्यों पिछड़ी और 2027 में उन्हें वापस कैसे हासिल किया जाए? इसके साथ ही एनडीए के प्रदर्शन की भी समीक्षा की जानी है। 403 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए को 273 सीटें मिली थीं। ऐसे में उन 130 सीटों पर भी मंथन होगा, जहां गठबंधन को जीत नहीं मिल सकी। यानी भाजपा की रणनीति केवल जीती हुई सीटों को बचाने तक सीमित नहीं है। पार्टी अब हारी हुई सीटों की बूथवार समीक्षा और उन्हें दोबारा जीतने की रणनीति तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

सपा-बसपा-कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों पर भी नजर

तावड़े ने पदाधिकारियों से विपक्ष की तैयारियों पर लगातार नजर रखने को कहा है। विधानसभा क्षेत्रों में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों, उनकी सक्रियता और स्थानीय प्रभाव की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे साफ है कि भाजपा 2027 की लड़ाई को केवल संगठन बनाम संगठन के रूप में नहीं, बल्कि प्रत्येक विधानसभा सीट पर स्थानीय समीकरणों के आधार पर लड़ने की तैयारी कर रही है। जातीय समीकरणों के साथ-साथ विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन, उम्मीदवारों की सामाजिक स्वीकार्यता और स्थानीय मुद्दों को भी चुनावी रणनीति में शामिल किया जाएगा।

मार्च तक 'नो लीव': शादी-ब्याह भी चुनावी ड्यूटी के आगे

बैठक में तावड़े ने संगठन के नेताओं की व्यस्तता को लेकर भी बेहद सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मार्च तक किसी प्रदेश या क्षेत्रीय पदाधिकारी के घर शादी-ब्याह होने पर भी चुनावी तैयारियों से छुट्टी नहीं मिलेगी। संदेश साफ है कि विधानसभा चुनाव तक संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को पूरी तरह चुनावी अभियान में सक्रिय रहना होगा। यह निर्देश भाजपा के भीतर 2027 के चुनाव को लेकर संगठन की गंभीरता को भी दिखाता है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि चुनाव की घोषणा से पहले ही बूथ स्तर तक संगठन की मशीनरी पूरी तरह तैयार हो जाए।

तावड़े ने पूछा- चुनाव कौन लड़ना चाहता है?

बैठक में तावड़े ने पदाधिकारियों से यह भी पूछा कि उनमें से कौन-कौन विधानसभा चुनाव लड़ना चाहता है। हालांकि बैठक में किसी पदाधिकारी ने हाथ नहीं उठाया। इसके बावजूद तावड़े ने संकेत दिया कि कुछ पदाधिकारियों ने उनसे व्यक्तिगत मुलाकात में चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। ऐसे नेताओं के नामों और उनकी दावेदारी को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व से चर्चा की जाएगी। इसका राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि भाजपा संगठन में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि संगठन में काम करने वाले नेताओं की चुनावी उपयोगिता और जमीनी पकड़ का आकलन भी किया जाता है।

परफॉर्मेंस रिपोर्ट बनेगी, उसी से तय होगा आगे का भविष्य

तावड़े ने क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों को एक और स्पष्ट संदेश दिया कि अब उनकी कार्यशैली की नियमित समीक्षा होगी। आने वाले दिनों में तावड़े खुद संगठनात्मक क्षेत्रों का दौरा करेंगे। वहां पदाधिकारियों के कामकाज, बूथ की सक्रियता और चुनावी तैयारियों का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद प्रदर्शन के आधार पर आगे की जिम्मेदारियां तय होंगी। इसका मतलब साफ है कि संगठन में 'काम करो और रिपोर्ट दो' की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।

बीएल संतोष के दौरे से पहले संगठन को तैयार करने की कवायद

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष 10 और 11 सितंबर को लखनऊ पहुंचेंगे। उनके दौरे से पहले युवा, महिला, किसान, अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी मोर्चों की प्रदेश टीमों का गठन पूरा करने की तैयारी है। बीएल संतोष विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर कोर कमेटी की बैठक भी करेंगे। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के सितंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह में लखनऊ आने की संभावना है। नबीन के दौरे तक दिसंबर तक के प्रचार, संगठन और चुनावी प्रबंधन का रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

तावड़े क्यों? चुनावी मैनेजमेंट में लंबा अनुभव

विनोद तावड़े को 18 अगस्त को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। तावड़े की पहचान भाजपा के ऐसे संगठनात्मक नेता के रूप में है, जिन्हें चुनावी प्रबंधन का लंबा अनुभव है। उनकी राजनीतिक यात्रा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से शुरू हुई। 2014 में वह महाराष्ट्र की बोरीवली विधानसभा सीट से विधायक चुने गए।

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय संगठन में जगह बनाई। 2020 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और बाद में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। 2022 में उन्हें यूपी, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में समन्वय की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें पंजाब को छोड़कर भाजपा ने बाकी चार राज्यों में सरकार बनाई। 2026 में उन्हें केरल विधानसभा चुनाव का प्रभारी बनाया गया। भाजपा केरल में तीन सीटें जीतकर विधानसभा में अपना खाता खोलने में सफल रही। यही चुनावी और संगठनात्मक अनुभव अब उत्तर प्रदेश में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती है।

2024 लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा के सामने बड़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए इसलिए भी सबसे महत्वपूर्ण राज्य है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को यहां अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला था। समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि भाजपा 33 सीटों पर सिमट गई। अब 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए केवल सत्ता बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि 2024 के झटके के बाद संगठन की ताकत और राजनीतिक पकड़ साबित करने की परीक्षा भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के सामने जहां सत्ता विरोधी रुझान को रोकने की चुनौती होगी, वहीं संगठन को बूथ स्तर पर पार्टी की कमजोरी दूर करनी होगी।

तावड़े की पहली बैठक से निकला राजनीतिक संदेश

तावड़े की पहली बैठक को भाजपा की सामान्य संगठनात्मक बैठक के बजाय 2027 के चुनावी अभियान की शुरुआती रणनीतिक बैठक के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में दिए गए निर्देशों से पार्टी की प्राथमिकताएं काफी हद तक स्पष्ट होती हैं- लखनऊ से ज्यादा विधानसभा, विधानसभा से ज्यादा बूथ और भाषण से ज्यादा जमीनी रिपोर्ट।

भाजपा अब चुनाव की औपचारिक घोषणा का इंतजार करने के बजाय पहले से ही संगठन को सक्रिय करना चाहती है। क्षेत्रीय अध्यक्षों और प्रभारियों की जवाबदेही तय करना, विपक्ष की तैयारियों की जानकारी जुटाना, जातीय समीकरणों का अध्ययन और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना इसी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले महीनों में तावड़े के लगातार संगठनात्मक दौरे और बीएल संतोष व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की लखनऊ यात्राएं यह संकेत दे रही हैं कि भाजपा ने 2027 के चुनाव की तैयारियों को अब पूरी तरह जमीन पर उतार दिया है।