एसएन में पहली बार हुई लेजर सर्जरी, पाइल्स-फिशर के इलाज पर आईसीएमआर करेगा रिसर्च

आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली बार पाइल्स, फिशर और फिस्टुला जैसी बीमारियों के इलाज के लिए लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी शुरू की गई है। इस तकनीक पर शोध करने के लिए आईसीएमआर ने एक विशेष परियोजना को मंजूरी दी है। डॉक्टरों का कहना है कि लेजर सर्जरी से मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव और जल्दी रिकवरी जैसे फायदे मिलेंगे। यह पहल खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए आधुनिक इलाज के नए रास्ते खोलेगी।

Jul 20, 2026 - 20:10
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एसएन में पहली बार हुई लेजर सर्जरी, पाइल्स-फिशर के इलाज पर आईसीएमआर करेगा रिसर्च
पहली लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी करने वाली डाक्टरों की टीम।

आगरा। आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज में पहली बार पाइल्स, फिशर, फिस्टुला और पाइलोनाइडल साइनस जैसी गंभीर समस्याओं के इलाज के लिए लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी की शुरुआत की गई है। खास बात यह है कि इस नई तकनीक और इसके परिणामों पर अध्ययन करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक महत्वपूर्ण शोध परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना के तहत लेजर सर्जरी की सुरक्षा, प्रभावशीलता और मरीजों को होने वाले दीर्घकालिक लाभों का वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन किया जाएगा। इससे भविष्य में देशभर के मरीजों को बेहतर और आधुनिक इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

आईसीएमआर की रिसर्च टीम करेगी अध्ययन

इस शोध परियोजना का नेतृत्व प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता, डॉ. अनुभव गोयल और डॉ. करण आर. रावत कर रहे हैं। वहीं, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) के डॉ. बृजेश शर्मा शोध और वैज्ञानिक समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, यह अध्ययन भारतीय परिस्थितियों में पाइल्स, फिशर और फिस्टुला जैसी बीमारियों के इलाज में लेजर तकनीक के प्रभाव का मूल्यांकन करेगा। इससे आने वाले समय में इलाज से जुड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देश तैयार करने में भी सहायता मिलेगी।

क्या है लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी?

लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी एक आधुनिक तकनीक है, जिसके जरिए पाइल्स, फिशर, फिस्टुला और पाइलोनाइडल साइनस जैसी समस्याओं का इलाज किया जाता है। पारंपरिक सर्जरी की तुलना में यह तकनीक अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मानी जाती है।

लेजर सर्जरी के फायदे 

ऑपरेशन के दौरान और बाद में कम दर्द।
बहुत कम रक्तस्राव।
शरीर के ऊतकों को कम नुकसान।
मरीज जल्दी ठीक होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।
संक्रमण और घाव की जटिलताओं का खतरा कम।
अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहने की जरूरत।
ऑपरेशन के बाद देखभाल आसान होती है।
मरीज की जीवन गुणवत्ता और कार्यक्षमता में सुधार होता है।
आम मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा

इस तकनीक की शुरुआत से अब सरकारी मेडिकल कॉलेज में आने वाले मरीजों को भी आधुनिक लेजर इलाज का लाभ मिल सकेगा। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर मरीज, जो महंगे निजी अस्पतालों में इलाज नहीं करा सकते, उन्हें कम खर्च में बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही, भारतीय मरीजों पर आधारित वैज्ञानिक आंकड़े तैयार होंगे, जो भविष्य में इलाज के तरीकों को और बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

डॉक्टरों ने क्या कहा?

प्रो. डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि एसएन मेडिकल कॉलेज हमेशा से इलाज के साथ-साथ शोध को भी प्राथमिकता देता रहा है। आईसीएमआर से मिली मंजूरी संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान क्षमता का प्रमाण है। डॉ. अनुभव गोयल के अनुसार, लेजर तकनीक ने प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। इससे मरीजों को कम दर्द और जल्दी आराम मिलता है।

डॉ. करण आर. रावत ने बताया कि आज भी कई लोग शर्म या सर्जरी के डर से पाइल्स और फिस्टुला जैसी समस्याओं का इलाज टालते रहते हैं। लेजर तकनीक ऐसे मरीजों के लिए सुरक्षित और आसान विकल्प साबित हो सकती है। वहीं, एमआरयू के डॉ. बृजेश शर्मा ने कहा कि किसी भी नई तकनीक की सफलता उसके वैज्ञानिक प्रमाणों पर निर्भर करती है। यह शोध उच्च गुणवत्ता के मानकों के अनुसार किया जाएगा।

पहली लेजर सर्जरी रही सफल

एसएन मेडिकल कॉलेज में पहली लेजर प्रॉक्टोलॉजी सर्जरी का सफल संचालन डॉ. करण आर. रावत और डॉ. अनुभव गोयल के नेतृत्व में किया गया। इस टीम में डॉ. ईशान, डॉ. शिवली, डॉ. गंगा दुबे और डॉ. मुकुल ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, एनेस्थीसिया विभाग की टीम के डॉ. रोहन और डॉ. अर्पिता ने ऑपरेशन को सुरक्षित और सफल बनाने में सहयोग किया। शल्य चिकित्सा विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. राजेश गुप्ता ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि एसएन मेडिकल कॉलेज को आधुनिक और न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाएगी।