आगरा में फर्जी दवाओं के सिंडिकेट पर बड़ा प्रहार, करोड़ों की कागजी बिलिंग का आरोप, सात नामजद
आगरा में कथित फर्जी दवा कारोबार के खिलाफ पुलिस और औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संगठित अपराध का मुकदमा दर्ज किया है। जांच में कई प्रतिष्ठानों पर री-लेबलिंग, फर्जी बिलिंग और संदिग्ध दवा कारोबार के आरोप सामने आए हैं। एफआईआर के मुताबिक, करीब 1.88 करोड़ रुपये की कागजी बिलिंग का मामला भी उजागर हुआ है। पुलिस और औषधि विभाग पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं।
री-लेबलिंग, फर्जी दस्तावेज और संदिग्ध सप्लाई चेन के आरोपों के बीच पुलिस और औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई, कई मेडिकल प्रतिष्ठान जांच के घेरे में
आगरा। शहर में कथित फर्जी दवा कारोबार के खिलाफ पुलिस और औषधि विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संगठित अपराध के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि शहर में लंबे समय से एक संगठित नेटवर्क फर्जी दस्तावेजों, री-लेबलिंग, कागजी बिलिंग और संदिग्ध तरीके से दवाओं की खरीद-फरोख्त में शामिल था।
मामले में कई प्रतिष्ठानों और कारोबारियों को नामजद किया गया है। पुलिस और औषधि विभाग अब पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेनदेन, सप्लाई चेन और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की गहन जांच कर रहे हैं।
तीन दिन तक चली जांच, कई प्रतिष्ठानों पर खंगाले गए रिकॉर्ड
एफआईआर के मुताबिक, औषधि विभाग की टीम ने 1, 2 और 3 जुलाई को शहर के विभिन्न मेडिकल प्रतिष्ठानों पर निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान वी.ए. मेडिकोज, रुद्रा एंटरप्राइजेज, श्री भगवती मेडिकल एजेंसी, वरदान मेडिकल एजेंसी और हर्षित ट्रेडर्स से जुड़े स्टॉक और दस्तावेजों की गहन जांच की गई। जांच के दौरान टीम को कई ऐसी दवाएं मिलीं, जिनके संबंध में वैध खरीद दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इनमें Jardiance, Telma-H, Thyrox और Gluconorm PG-2 जैसी प्रमुख दवाएं शामिल हैं। अधिकारियों का आरोप है कि कुछ दवाओं के मूल लेबल हटाकर उन पर नए लेबल लगाए गए थे, जिससे उनकी वास्तविक पहचान और सप्लाई स्रोत को छिपाया जा सके।
यूवी टेस्ट में सुरक्षा फीचर नहीं मिलने का दावा
एफआईआर के अनुसार, जांच के दौरान बरामद Telma-H दवा का अल्ट्रावॉयलेट (यूवी) सुरक्षा परीक्षण किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि दवा में निर्धारित सुरक्षा फीचर नहीं पाए गए। इसके अलावा छापेमारी के दौरान खुले मोनोकार्टन, पुराना स्टॉक और कई संदिग्ध दवाएं भी बरामद होने की बात सामने आई है। इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाया गया है।
1.88 करोड़ रुपये की कागजी बिलिंग का आरोप
जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि पहले से निरस्त हो चुकी वरदान मेडिकल एजेंसी के पुराने बिलों का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। एफआईआर के मुताबिक, इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर करीब 1.88 करोड़ रुपये की दवाओं की कागजी बिलिंग की गई। आरोप है कि विभिन्न फर्मों के बीच फर्जी बिल तैयार कर दवाओं को वैध दिखाने और कथित अवैध कारोबार को छिपाने की कोशिश की गई। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य कारोबारी और सप्लाई चैनल कौन-कौन से हैं।
मुकदमे में ये लोग नामजद
मुकदमे में शोभित अग्रवाल, प्रमोद अग्रवाल (वी.ए. मेडिकोज), प्रवीण अग्रवाल (श्री भगवती मेडिकल एजेंसी), अंकुर अग्रवाल (वरदान मेडिकल एजेंसी), मोहित बंसल (रुद्रा एंटरप्राइजेज), हर्षित ट्रेडर्स (फर्म) और रोहित अग्रवाल (हर्षित ट्रेडर्स) के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसियां खंगाल रही हैं पूरे नेटवर्क की कड़ियां
पुलिस और औषधि विभाग संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय लेनदेन, दवा आपूर्ति की श्रृंखला, बिलिंग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित कड़ियों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।