तीन दशक की मुहिम को मिला बड़ा सम्मान: वाइल्डलाइफ एसओएस को मिला प्रतिष्ठित 'टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड'
भारत में बाघ संरक्षण और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ तीन दशक से चल रही मुहिम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। रणथंभौर में आयोजित 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक-2026 के दौरान वाइल्डलाइफ एसओएस को वन्यजीव संरक्षण, एंटी-पोचिंग अभियानों और बाघों के सुरक्षित भविष्य के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों पर प्रतिष्ठित 'टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया। यह सम्मान संगठन की ओर से सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने ग्रहण किया।
आगरा/रणथंभौर। 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक-2026 में वाइल्डलाइफ एसओएस को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित 'टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड' प्रदान किया गया। समारोह में देश-विदेश के संरक्षण विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, वन अधिकारी, शोधकर्ता, वन्यजीव फोटोग्राफर, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि तथा वन्यजीव प्रेमी शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने किया।
सम्मान ग्रहण करने के बाद वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कार्तिक सत्यनारायण ने संगठन के एंटी-पोचिंग अभियानों पर प्रस्तुति देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी टीम, वन विभाग और उन स्थानीय समुदायों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है, जो बाघों की सुरक्षा के लिए जोखिम उठाकर लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अवैध शिकार के विरुद्ध लड़ाई अक्सर दूरदराज के क्षेत्रों में होती है और इसमें खुफिया तंत्र, कानून प्रवर्तन एजेंसियों तथा स्थानीय लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
संगठन ने बताया कि पिछले तीन दशकों से वह अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक लगाने और बाघों सहित संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। उसकी एंटी-पोचिंग इकाई वन विभाग, पुलिस तथा अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर वन्यजीव तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, वन्यजीवों की खाल, शरीर के अंग, हाथीदांत तथा जीवित वन्यजीवों की बरामदगी और कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करती रही है। इन अभियानों से कई संगठित शिकार गिरोहों का पर्दाफाश हुआ तथा तमिलनाडु में बाघ शिकार से जुड़े एक ऐतिहासिक मामले में दोषसिद्धि भी सुनिश्चित हुई।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने कार्तिक सत्यनारायण के व्याख्यान की सराहना करते हुए कहा कि वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध जन-जागरूकता, प्रभावी कानून प्रवर्तन और समयबद्ध न्यायिक कार्रवाई संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वाइल्डलाइफ एसओएस के प्रयासों को प्रेरणादायक बताया।
वाइल्डलाइफ एसओएस की सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि भारत में बाघों की संख्या बढ़ना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अवैध शिकार आज भी सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। ऐसे में बाघों और उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए सतत और समर्पित प्रयास जारी रखना समय की आवश्यकता है।
साल 1995 में स्थापित वाइल्डलाइफ एसओएस पूरे भारत में संकटग्रस्त वन्यजीवों के बचाव, पुनर्वास, अवैध वन्यजीव व्यापार पर रोक, मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने तथा हाथियों सहित अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों का संचालन कर रहा है।