मेंटल हेल्थ कार्निवलः संगीत की तरंगों में छिपा मानसिक स्वास्थ्य का समाधान
आगरा। आगरा के पहले मेंटल हेल्थ कार्निवल के दूसरे दिन ‘संगीत और मानसिक स्वास्थ्य’ विषय पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह आयोजन विमल विहार, सिकंदरा-बोदला रोड स्थित "फीलिंग्स माइंड्स" संस्था के सेंटर पर हुआ।
मुख्य वक्ता काशी विद्यापीठ के डॉ. दुर्गेश उपाध्याय ने बताया कि संगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह मानसिक रोगों के इलाज का प्रभावी और सुलभ तरीका भी है। उन्होंने कहा कि म्यूजिक थेरेपी के माध्यम से अवसाद, चिंता, तनाव जैसी मानसिक समस्याओं का इलाज बिना किसी साइड इफेक्ट के किया जा सकता है।
डॉ. उपाध्याय ने उदाहरण देते हुए कहा कि "अब तो बड़े अस्पतालों में ऑपरेशन के समय भी मंत्रों या मधुर धुनों का प्रयोग किया जाता है।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि म्यूजिक थेरेपी का अर्थ संगीतज्ञ बनना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य व्यक्ति की अभिव्यक्ति की कला को जागृत करना है।
कार्यशाला में शास्त्रीय गायिका प्रतिभा तालेगांवकर ने कहा कि "संगीत जीवन है और जीवन ही संगीत है।" उन्होंने बताया कि शोध में यह प्रमाणित हो चुका है कि कोमा में गए मरीजों पर भी संगीत सकारात्मक प्रभाव डालता है।
डॉ. रणवीर त्यागी ने बताया कि बच्चों के विकास में संगीत का विशेष महत्व है – यह माँ और बच्चे के बीच का जुड़ाव बढ़ाता है और तनाव को कम करता है।
संस्था की संस्थापक एवं अंतर्राष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक डॉ. चीनू अग्रवाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में अभी भी बहुत भ्रम है। "लोग मानसिक बीमारी को पागलपन से जोड़ते हैं, जबकि यह एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है, जिसका इलाज संभव है।"
संस्थान के सह-संस्थापक डॉ. रविंद्र अग्रवाल ने जानकारी दी कि आगामी सत्र में लेखिका पल्लवी नियोजी चित्रकला के माध्यम से मानसिक सुकून के रंग भरना सिखाएंगी।
कार्यशाला में आगरा के अलावा लखनऊ, नोएडा, मध्यप्रदेश आदि स्थानों से लोग उपस्थित हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना और संगीत जैसे रचनात्मक माध्यमों के जरिए उपचार के नए आयाम खोलना है।