आगरा के श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की धर्मसभा में गूंजा णमोकार मंत्र का संदेश, आचार्य निर्भय सागर ने बताया आत्मा के शत्रुओं पर विजय का मार्ग

आगरा। श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर-7, आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा में वैज्ञानिक संत आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज एवं मुनि श्री शिवदत्त सागर जी महाराज ससंघ की उपस्थिति में भव्य धर्मसभा का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत एक नन्हीं बालिका द्वारा मंगलाचरण से हुई। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट सहित विभिन्न मांगलिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।

Jun 28, 2026 - 14:10
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आगरा के श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर की धर्मसभा में गूंजा णमोकार मंत्र का संदेश, आचार्य निर्भय सागर ने बताया आत्मा के शत्रुओं पर विजय का मार्ग
श्री शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, सेक्टर-7, आवास विकास कॉलोनी में रविवार को हुई धर्मसभा में प्रवचन करते मुनिश्री। 

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज ने णमोकार मंत्र के प्रथम पद की गहन आध्यात्मिक व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि णमोकार मंत्र के प्रथम पद के तीन अलग-अलग उच्चारणों और उनके अर्थों का जैन दर्शन में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। आचार्य कुन्दकुन्द स्वामी, पुष्पदंत-भूतबली महाराज तथा धरसेन स्वामी की परंपरा में इन शब्दों का विशिष्ट महत्व बताया गया है।

आचार्य श्री ने कहा कि 'अरि' का अर्थ शत्रु होता है। जिन महापुरुषों ने आत्मा के वास्तविक शत्रुओं का पूर्ण रूप से नाश कर दिया है, वे अरिहंत परमेष्ठी कहलाते हैं। उन्होंने बताया कि ज्ञानावरण, दर्शनावरण, मोहनीय तथा अंतराय—ये चार घातिया कर्म आत्मा के सबसे बड़े शत्रु हैं। इन कर्मों का पूर्ण क्षय करने वाले ही अरिहंत पद को प्राप्त करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अरहंत वे हैं जिन्हें तीनों लोकों के समस्त जीव नमस्कार करते हैं और जो सर्वथा पूजनीय हैं। वहीं अरुहंत वे हैं जिनका जन्म-मरण रूपी सबसे बड़ा रोग सदैव के लिए समाप्त हो चुका है। ऐसे परमेष्ठी भगवान को बार-बार नमस्कार करना आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है।

धर्मसभा में मुनि श्री शिवदत्त सागर जी महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए धर्म, संयम और आत्मशुद्धि का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य आत्मा की पवित्रता और जीवन में सदाचार का विकास करना है।

आचार्य श्री 108 निर्भय सागर जी महाराज ने श्री शान्तिनाथ पाठशाला के बच्चों को भी धर्म, संस्कार और नैतिक जीवन के महत्व के बारे में प्रेरणादायक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बच्चों से बचपन से ही धार्मिक संस्कारों को अपनाने और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन, कोषाध्यक्ष मगन चंद जैन, विजय जैन निमोरब, महेश चंद जैन, सुशील जैन, सुदीप जैन, अरुण जैन, सतेंद्र जैन, नीरज जैन, मनोज जैन, संजय जैन, जितेश जैन, विपुल जैन, अमित जैन, सिद्धार्थ जैन, मोहित जैन, वैभव जैन, प्रशांत जैन, गौरव जैन, शुभम जैन, अभिषेक जैन तथा मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित सकल जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor