अखिल भारतीय महिला परिषद की संगोष्ठी में पेड़ लगाने और पानी बचाने का संदेश

आगरा। तेजी से बढ़ते जलवायु परिवर्तन और उसके गंभीर दुष्परिणामों को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय महिला परिषद की नगर शाखा ने उमा कुंज, भावना एस्टेट स्थित सीताराम मंदिर में जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में 60 से अधिक महिलाओं और बच्चों को जलवायु परिवर्तन के कारणों, उसके दुष्प्रभावों तथा पर्यावरण संरक्षण के उपायों की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि आज प्रकृति को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

Jun 16, 2026 - 19:20
 0
अखिल भारतीय महिला परिषद की संगोष्ठी में पेड़ लगाने और पानी बचाने का संदेश
अखिल भारतीय महिला परिषद की संगोष्ठी में मौजूद पदाधिकारी।

कविता के माध्यम से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

संगोष्ठी की शुरुआत वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. मधु भारद्वाज की संदेशपरक पंक्तियों से हुई—

"चाहे जितना भी विकास करो, लेकिन वनों का न नाश करो। वृक्ष रहेंगे तो ही जीवन होगा, ऐसा तुम सब विश्वास करो।"

इन पंक्तियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

वनों की कटाई से बढ़ रहा पर्यावरणीय संकट

अखिल भारतीय महिला परिषद नगर शाखा की अध्यक्ष श्रीमती उमा सिंह ने कहा कि वनों की लगातार कटाई के कारण वर्षा का संतुलन बिगड़ रहा है। भूजल स्तर और ऑक्सीजन की मात्रा घट रही है, जबकि तापमान लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे समुद्र तटीय क्षेत्रों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने सभी से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

'वृक्ष बचाना समय की सबसे बड़ी जरूरत'

सरोज प्रशांत ने कहा कि वर्तमान समय में वनों और वृक्षों का संरक्षण सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। यदि प्रकृति का संतुलन बिगड़ता रहा तो मानव जीवन भी गंभीर संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने सभी से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने की अपील की।

प्रोजेक्टर के माध्यम से समझाए सरल उपाय

सुश्री मानी महाजन ने प्रोजेक्टर के माध्यम से चित्रों सहित सरल भाषा में जलवायु परिवर्तन के कारण और उससे बचाव के उपायों को समझाया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अधिक से अधिक वृक्ष लगाने चाहिए, पानी का अनावश्यक उपयोग रोकना चाहिए तथा वाहन और वातानुकूलित यंत्र (एसी) केवल आवश्यकता पड़ने पर ही चलाने चाहिए। उन्होंने बताया कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करके भी जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

संगोष्ठी में श्रीमती उमा सिंह, श्रीमती रजनी शर्मा, सरोज प्रशांत, चित्ररेखा कटियार, ममता खन्ना, रूपा मेहरा, रश्मि कुलश्रेष्ठ, चंदा मेहरोत्रा एवं वर्षा खन्ना प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन प्रेमलता मिश्रा ने किया।

SP_Singh AURGURU Editor