पृथ्वी माता के श्रृंगार से दिया संस्कारों का संदेश, संस्कार भारती ने पृथ्वी दिवस को भू अलंकरण दिवस के रूप में मनाकर सजाईं आकर्षक रंगोलियां

आगरा। पृथ्वी दिवस के अवसर पर संस्कार, सृजन और सांस्कृतिक चेतना का अनूठा संगम देखने को मिला, जब संस्कार भारती आगरा महानगर द्वारा 22 अप्रैल को ‘भू अलंकरण दिवस’ के रूप में भव्य रंगोली सज्जा कार्यक्रम आयोजित किया गया। दयालबाग स्थित सृजनिका आर्ट गैलरी एवं स्टूडियो से लेकर शमसाबाद रोड स्थित मारुति फॉरेस्ट तक कलाकारों ने पृथ्वी माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए रंगों के माध्यम से समाज को संरक्षण और संवेदनशीलता का संदेश दिया।

Apr 22, 2026 - 19:05
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पृथ्वी माता के श्रृंगार से दिया संस्कारों का संदेश, संस्कार भारती ने पृथ्वी दिवस को भू अलंकरण दिवस के रूप में मनाकर सजाईं आकर्षक रंगोलियां
पृथ्वी दिवस पर संस्कार भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सजाई गई रंगोली की एक झलक।

पृथ्वी दिवस कार्यक्रम में मौजूद नंद नंदन गर्ग, मनोज कुमार और अन्य।

पृथ्वी है जीवन का आधार, आभार व्यक्त करना हमारा कर्तव्य

कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री नन्द नन्दन गर्ग ने कहा कि पृथ्वी हमारे अस्तित्व का मूल आधार है और भारतीय संस्कृति में इसे माता का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि वायु, अग्नि, जल और आकाश का अस्तित्व भी पृथ्वी पर ही निर्भर है, इसलिए पृथ्वी दिवस पर उसका श्रृंगार कर आभार प्रकट करना हमारी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है।

भू अलंकरण से सृजन और संस्कृति को मिलता है विस्तार

कार्यक्रम का शुभारंभ पार्षद भरत शर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि भू अलंकरण के विविध प्रतीक हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं और रंगोली के माध्यम से इनका प्रदर्शन समाज में सृजनशीलता को बढ़ावा देता है।

ललित कला संस्थान आगरा के उपनिदेशक एवं सम्मानित चित्रकार डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कलाएं समाज में विचारों और संस्कारों को प्रभावी ढंग से स्थापित करने का सबसे सशक्त माध्यम हैं, और संस्कार भारती इसी दिशा में कार्य कर रही है।

रंगोली केवल सजावट नहीं, 64 कलाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा

संस्कार भारती की दृश्य कला प्रमुख एवं सृजनिका आर्ट गैलरी की निदेशक डॉ. आभा सिंह गुप्ता ने कहा कि रंगोली केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की 64 कलाओं में शामिल एक महत्वपूर्ण कला है, जो सृजनशीलता को विकसित करने में अहम भूमिका निभाती है।

प्रांतीय संरक्षक आलोक आर्य ने रंगोली को सांकेतिक भाषा बताते हुए कहा कि इसमें प्रयुक्त हर प्रतीक अपने भीतर गहरे अर्थ समेटे होता है और इसका उद्देश्य सौंदर्य के साथ मंगल की सिद्धि करना है।

पृथ्वी माता का आभार रंगों में झलका

प्रख्यात कवयित्री एवं चित्रकार रश्मि सिंह ने कहा कि पृथ्वी माता समस्त जीवों का पालन-पोषण करती हैं, इसलिए पृथ्वी दिवस पर मन, वचन और कर्म से उनका आभार व्यक्त करना आवश्यक है।

कलाकारों ने बिखेरे रंग, दिया संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम में सुदेश कुमार के नेतृत्व में अंजली कुशवाहा सहित कई कलाकारों ने आकर्षक रंगोलियां सजाईं।
इस अवसर पर डॉ. एकता श्रीवास्तव, डॉ. यशोयश, इंजीनियर अतुल गुप्ता, लक्ष्मी गुप्ता, एडवोकेट संजय कुमार, दीपक चौधरी, नीनू गर्ग, जितेन्द्र पमनानी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

शमसाबाद रोड पर भी सजी ‘भू अलंकरण’ की छटा

संस्कार भारती द्वारा दूसरा कार्यक्रम मारुति फॉरेस्ट, शमसाबाद रोड पर आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. एकता श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में ध्रुव श्रीवास्तव, वर्षा गुप्ता, स्टीना शर्मा, नमित श्रीवास्तव, समृद्धि गुप्ता, अवनी गुप्ता, लवी और वंश श्रीवास्तव ने रंगोली के माध्यम से पृथ्वी संरक्षण का संदेश दिया।

SP_Singh AURGURU Editor