करोड़ों की मरम्मत या कागज़ी खेल? आगरा के डॊ. आंबेडकर विश्वविद्यालय में विधि संकाय के दो कमरों की छत और फॊल सीलिंग गिरने से खुली पोल, जिम्मेदारों की लापरवाही से एक कर्मचारी की जान पर जोखिम, हादसे के बाद अन्य कर्मचारी और छात्रों में डर का माहौल

आगरा के डॊ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में हर साल मोटा पैसा निर्माण कार्यों में पानी की तरह बहाया जा रहा है। लेकिन गुणवत्ता की बात करें तो कल हुए हादसे के बाद इसकी असलियत सामने आ गई है। विवि के विधि संकायत में कल हुए हादसे के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी या नहीं, इस बात को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

Apr 22, 2026 - 12:45
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करोड़ों की मरम्मत या कागज़ी खेल? आगरा के डॊ. आंबेडकर विश्वविद्यालय में विधि संकाय के दो कमरों की छत और फॊल सीलिंग गिरने से खुली पोल, जिम्मेदारों की लापरवाही से एक कर्मचारी की जान पर जोखिम, हादसे के बाद अन्य कर्मचारी और छात्रों में डर का माहौल

-गौरव प्रताप सिंह-

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में मंगलवार को विधि संकाय में दो रूम की फॊल सीलिंग भरभराकर गिर गई। हादसे में एक कर्मचारी घायल हो गया। उसे उपचार के लिए उसे अस्पताल में भेजा गया है। कल के इस हादसे के बाद विश्वविद्यालय में मरम्मत के नाम पर हुए निर्माण कार्यों की पोल खुलकर सामने आ गई है। मरम्मत के नाम पर विश्वविद्यालय ने करोड़ों रुपये खर्च किये हैं, जिसे लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। कल हुए हादसे के बाद छात्रों और कर्मचारियों को अनहोनी का डर सताने लगा है।

फॊल सीलिंग गिरने के बाद दिखाई देतीं छत की ईटें। 

पिछले कुछ सालों की बात करें तो विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपए मरम्मत के नाम पर खर्च किए गए हैं। क्या यह मरम्मत फाइलों में ही हुई है, यह सवाल मंगलवार को विधि संकाय में दो कमरों की छत और फॊल सीलिंग गिरने के बाद खड़ा हो हो रहा है। जिस समय छत गिरी वहां कर्मचारी बलवीर सिंह मौजूद थे। उनके ऊपर छत का मलबा गिरने के बाद विश्वविद्यालय में खलबली मच गई। अन्य कर्मचारी दौड़ते हुए पहुंचे और घायल बलवीर को उपचार के लिए अस्पताल में ले गए। इस हादसे के बाद दोनों कमरों में छत के नाम पर छत के ऊपर लगने वाली ईंटें ही दिखाई दे रही हैं। 

बता दें कि इससे पहले ही डिग्री विभाग के बाहर एक कर्मचारी के ऊपर छत का प्लास्टर गिर चुका है। मंगलवार को विधि संकाय में हुए हादसे की सूचना पाने के बाद एनएसयूआई के सतीश सिकरवार भी मौके पर पहुंचे। सतीश का कहना है कि विश्वविद्यालय में मरम्मत कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला हुआ है। गनीमत रही जिस समय छत गिरी वहां पर छात्र नहीं थे, नहीं तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी।

सतीश का कहना है कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। आखिर उन्होंने हुए कार्य की गुणवत्ता चेक क्यों नहीं की। वह भी इस हादसे के बराबर के जिम्मेदार हैं। विश्वविद्यालय में नेक के आने से पहले भी निर्माण कार्यों में मोटा पैसा  खर्च किया गया है। छत गिरने की जानकारी करने के लिए कुलसचिव अजय मिश्रा का भी फोन लगाया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा।