सड़क हादसों पर मंत्रालय की सुस्ती सवालों के घेरे में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद एक साल देर से आई रिपोर्ट, एडवोकेट केसी जैन ने उठाए गंभीर सवाल, बोले- जब दुर्घटनाओं के आंकड़े ही समय पर नहीं आएंगे तो जानें कैसे बचेंगी
आगरा। देश में हर वर्ष लाखों सड़क दुर्घटनाओं में हजारों लोगों की जान चली जाती है, लेकिन इन हादसों के वास्तविक कारणों, रुझानों और समाधान से जुड़े आधिकारिक आंकड़े समय पर सामने नहीं आ रहे हैं। सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता के.सी. जैन ने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्टों का समयबद्ध प्रकाशन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने कहा कि जब दुर्घटनाओं के आंकड़े ही वर्षों की देरी से प्रकाशित होंगे तो सड़क सुरक्षा संबंधी नीतियां भी प्रभावी नहीं बन पाएंगी।
श्री जैन ने बताया कि उन्होंने सड़क दुर्घटना रिपोर्टों के समयबद्ध प्रकाशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आई.ए. संख्या 260997/2024 दायर की थी। इस आवेदन पर सुनवाई करते हुए 17 अप्रैल 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि प्रत्येक कैलेंडर वर्ष समाप्त होने के छह माह के भीतर सड़क दुर्घटनाओं की वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की जाए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि ऐसी रिपोर्टें तभी उपयोगी सिद्ध होंगी जब उनका प्रकाशन शीघ्रता से किया जाए।
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार वर्ष 2024 की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट 30 जून 2025 तक प्रकाशित हो जानी चाहिए थी, लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया–2024 रिपोर्ट 11 जून 2026 को जारी की। यानी निर्धारित समय-सीमा के लगभग एक वर्ष बाद। यह देरी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है और इससे सड़क सुरक्षा संबंधी नीतिगत निर्णयों की प्रभावशीलता प्रभावित होती है।
एडवोकेट के.सी. जैन ने बताया कि उन्होंने इस विषय पर मंत्रालय को पहले ही सचेत किया था। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग सचिव को 11 मई 2026, 21 मई 2026 तथा 12 जून 2026 को तीन विस्तृत पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की याद दिलाई और रिपोर्ट शीघ्र प्रकाशित करने की मांग की थी। उन्होंने अपने पत्रों में स्पष्ट किया था कि सड़क दुर्घटना आंकड़ों का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि समय पर नीति निर्माण और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटाबेस (iRAD) तथा ई-डीएआर (e-DAR) जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियां पूरे देश में लागू हो चुकी हैं। दुर्घटनाओं का डेटा अब पुलिस, परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सड़क एजेंसियों तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है। दुर्घटनाओं की जियो टैगिंग और डिजिटल रिकॉर्डिंग भी हो रही है। ऐसे में वार्षिक रिपोर्टों के प्रकाशन में लगभग एक वर्ष की देरी का कोई तार्किक औचित्य नहीं बचता।
श्री जैन ने वर्ष 2025 की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार यह रिपोर्ट 30 जून 2026 तक प्रकाशित होना अनिवार्य है, लेकिन समय-सीमा समाप्त होने में अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं और रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है। यदि यह रिपोर्ट भी समय पर प्रकाशित नहीं होती है तो देश सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों से एक बार फिर वंचित रह जाएगा।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटना रिपोर्टों से यह पता चलता है कि किन राज्यों में दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, किन वर्गों के लोग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, पैदल यात्रियों, दोपहिया चालकों और यात्रियों की स्थिति क्या है, दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण क्या हैं, किन क्षेत्रों और सड़कों पर विशेष हस्तक्षेप की आवश्यकता है तथा कौन-सी नीतियां प्रभावी सिद्ध हो रही हैं। यदि यह जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं होगी तो दुर्घटनाओं और मृत्यु दर को कम करने के प्रयास भी प्रभावित होंगे।
के.सी. जैन ने स्पष्ट कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में यह आवेदन इसलिए दायर किया था ताकि सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े समय पर देश के सामने आएं और उनके आधार पर प्रभावी नीतिगत निर्णय लिए जा सकें। उन्होंने वर्ष 2024 की रिपोर्ट के प्रकाशन का स्वागत करते हुए कहा कि लगभग एक वर्ष की देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वर्ष 2025 की सड़क दुर्घटना रिपोर्ट 30 जून 2026 तक प्रकाशित नहीं की जाती है तो वह इस पूरे मामले को पुनः सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाएंगे तथा आवश्यक निर्देश और अवमानना संबंधी कार्यवाही के लिए उपयुक्त आवेदन प्रस्तुत करेंगे।