मानसून की रफ्तार धीमी: कई राज्यों में बारिश का लंबा ब्रेक, मौसम विभाग को अगले सिस्टम का इंतजार, अल नीनो ने बढ़ाई चिंता
नई दिल्ली। देशभर में पिछले दिनों हुई झमाझम बारिश के बाद अब दक्षिण-पश्चिम मानसून की गति अचानक धीमी पड़ गई है। उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत के अनेक हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कम हो गई हैं, जिससे उमस और गर्मी ने फिर से लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक अधिकांश राज्यों में व्यापक वर्षा की संभावना कम रहेगी। अब सभी की नजर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले अगले मौसम तंत्र पर टिकी है, जिसके सक्रिय होने के बाद ही मानसून के दोबारा रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है।
जुलाई के दूसरे पखवाड़े में कमजोर रहा है मानसून
मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई के शुरुआती दिनों में कई राज्यों में अच्छी बारिश दर्ज की गई थी, लेकिन अब मानसून कमजोर चरण में पहुंच गया है। अगले छह से सात दिनों तक मध्य भारत और दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने के संकेत हैं। मौसम का यह रुख जुलाई के दूसरे पखवाड़े तक बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
अल नीनो ने बढ़ाई मौसम वैज्ञानिकों की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो की स्थिति का असर भारतीय मानसून पर भी दिखाई देने लगा है। समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं की ताकत कमजोर पड़ जाती है, जिससे वर्षा का वितरण प्रभावित होता है। यही कारण है कि इस समय मानसून अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहा है।
इन राज्यों में बारिश की कमी के आसार
बारिश में कमी का असर राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र के कई हिस्सों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में अधिक देखने को मिल सकता है। वहीं उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में भी वर्षा का अंतराल बढ़ने की संभावना है। हालांकि हिमालयी राज्यों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर तेज बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।
खेती पर पड़ सकता है असर
मानसून की धीमी चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलों के लिए जुलाई का महीना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि बारिश में लंबा अंतराल बना रहता है तो सिंचाई पर निर्भरता बढ़ेगी और फसलों की शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। इससे उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
जलाशयों और बिजली व्यवस्था पर भी नजर
यदि बारिश का यह कमजोर दौर लंबे समय तक जारी रहता है तो जलाशयों में पानी का स्तर बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। दूसरी ओर, उमस और तापमान बढ़ने से बिजली की मांग में भी इजाफा होने की संभावना है। ऐसे में ऊर्जा और जल प्रबंधन से जुड़े विभाग भी मौसम की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
अब अगले मौसम तंत्र का इंतजार
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में यदि नया निम्न दबाव क्षेत्र विकसित होता है तो मानसून को दोबारा मजबूती मिल सकती है। इसके बाद देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश का नया दौर शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल अगले कुछ दिनों तक अधिकांश क्षेत्रों में केवल हल्की या छिटपुट बारिश की संभावना बनी हुई है।