नेचुरोपैथी की आड़ में करोड़ों का खेल, जीएसटी जांच में खुली 25 करोड़ की करमुक्त सेवाओं की परत

आगरा में जीएसटी विभाग ने गो नेचर नामक फर्म के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नेचुरोपैथी सेवाओं के नाम पर 25 करोड़ रुपये से अधिक की करमुक्त सेवाओं के दावे की जांच शुरू की है। अधिकारियों ने सदस्य बनकर वेबिनार और वर्कशॉप में भाग लिया, जहां डाइट और फिटनेस प्लान बेचने के साक्ष्य मिले। जांच में कर योग्य सेवाओं के टैक्स इनवॉइस भी सामने आए। विभाग ने अब तक 1.19 करोड़ रुपये जमा करा लिए हैं, जबकि मामले की जांच जारी है।

Jun 21, 2026 - 01:55
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नेचुरोपैथी की आड़ में करोड़ों का खेल, जीएसटी जांच में खुली 25 करोड़ की करमुक्त सेवाओं की परत

आगरा। आगरा में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने कर चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए नेचुरोपैथी सेवाओं के नाम पर करोड़ों रुपये की करमुक्त सेवाएं दिखाने वाली एक फर्म के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच के दौरान विभाग को प्राथमिक रूप से ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि फर्म द्वारा करमुक्त स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में कर योग्य सेवाओं का कारोबार किया जा रहा था।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, गो नेचर (Go Nature) नामक फर्म ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 20.36 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2024-25 में 5.15 करोड़ रुपये की सेवाओं को करमुक्त (Exempted Services) श्रेणी में दर्शाया था। इस प्रकार दो वर्षों में फर्म ने कुल 25 करोड़ रुपये से अधिक की सेवाओं पर कर छूट का दावा किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जीएसटी अधिकारियों ने जांच के लिए विशेष रणनीति अपनाई। अधिकारियों ने सामान्य ग्राहकों की तरह फर्म की सदस्यता ली और उसके ऑनलाइन वेबिनार, वर्कशॉप तथा विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया। जांच के दौरान पाया गया कि फर्म मुख्य रूप से डाइट प्लान, फिटनेस प्रोग्राम, वेलनेस कोर्स और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट सेवाएं बेच रही थी, जबकि इन्हें नेचुरोपैथी उपचार सेवाओं के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था।

जांच में यह भी सामने आया कि फर्म द्वारा कई ग्राहकों को कर योग्य सेवाओं के लिए टैक्स इनवॉइस जारी किए गए थे। इससे विभाग को संदेह हुआ कि वास्तविक गतिविधियों और करमुक्त सेवाओं के दावों में बड़ा अंतर है।

जीएसटी टीम ने फर्म के पंजीकृत पते और संचालन स्थल का भी निरीक्षण किया। अधिकारियों को वहां किसी प्रकार का नेचुरोपैथी उपचार केंद्र, चिकित्सकीय व्यवस्था या उपचार संबंधी आधारभूत ढांचा नहीं मिला। इससे फर्म के दावों पर और सवाल खड़े हो गए।

प्रारंभिक जांच के आधार पर विभाग ने फर्म से 1.19 करोड़ रुपये जमा करा लिए हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अभी शुरुआती चरण में है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। रिकॉर्ड, लेनदेन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कर देयता और बढ़ सकती है।

जीएसटी विभाग का मानना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला करमुक्त सेवाओं की श्रेणी का गलत उपयोग कर बड़े पैमाने पर कर बचाने का हो सकता है। विभाग अन्य संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच कर रहा है।