सड़क निर्माण के घोटाला कार्यस्थल से एक किलोमीटर दूर 25 मीटर सड़क बनाने का निकला, नगर निगम के इंजीनियर से लेकर ठेकेदार दोषी पाए गये, नगरायुक्त ने शासन से की कड़ी कार्रवाई की सिफारिश, मेयर ने की थी शिकायत

आगरा। शहर के हेमा पेट्रोल पंप से पश्चिमपुरी जाने वाले मार्ग के निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग के कई अधिकारी और कार्यदायी फर्में दोषी पाई गई हैं। महापौर हेमलता दिवाकर कुशवाहा की शिकायत और शासन के निर्देश पर नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने जांच कराकर शासन को सख्त कार्रवाई की संस्तुति भेज दी है।

Apr 25, 2026 - 21:55
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सड़क निर्माण के घोटाला कार्यस्थल से एक किलोमीटर दूर 25 मीटर सड़क बनाने का निकला, नगर निगम के इंजीनियर से लेकर ठेकेदार दोषी पाए गये, नगरायुक्त ने शासन से की कड़ी कार्रवाई की सिफारिश, मेयर ने की थी शिकायत

इस मामले में महापौर ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद शासन स्तर से जांच के निर्देश जारी हुए। नगर आयुक्त ने प्रभारी मुख्य अभियंता और स्वतंत्र थर्ड पार्टी एजेंसी के माध्यम से तकनीकी और स्थलीय जांच कराई।  

जांच में पाया गया कि सड़क चौड़ीकरण और ब्लैक टॉपिंग के लिए करीब 53.92 लाख रुपये तथा साइड पटरी पर इंटरलॉकिंग टाइल्स के लिए 79.37 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। दोनों कार्यों के लिए विधिवत ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई गई थी, लेकिन कार्य के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ी सामने आई।

जांच में यह पाया गया कि स्वीकृत स्थल के बजाय लगभग 1 किलोमीटर दूर 25 मीटर सड़क का निर्माण करा दिया गया। साथ ही निर्माण की गुणवत्ता भी बेहद खराब पाई गई।

हालांकि इस मामले को जितना बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा था, वैसा कुछ नहीं निकला। जांच में यह मामला केवल 25 मीटर सड़क स्वीकृत स्थल से एक किलोमीटर कराए जाने का निकला। चूंकि सरकारी कार्यप्रणाली में जरा सी भी गड़बड़ी पर एक्शन होता है, इसलिए नगरायुक्त ने इस मामले में एक्शन लिया। 

फर्मों पर जुर्माना, ब्लैकलिस्ट की चेतावनी

जांच के बाद मैं. अक्षत कंस्ट्रक्शन (प्रो० राम प्रकाश अग्रवाल) और मैं. एसके विरानी (प्रो. एसके विरानी) पर आर्थिक दंड लगाया गया है। दोनों फर्मों को अंतिम चेतावनी देते हुए साफ किया गया है कि भविष्य में सुधार न होने पर ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।

इंजीनियरिंग स्टाफ पर गिरी गाज

नगर आयुक्त की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि वर्क सुपरवाइजर, अवर अभियंता और सहायक अभियंता ने लापरवाही बरती और भ्रामक जानकारी देकर स्वीकृति हासिल की। इस कारण कार्य को गलत स्थान पर कराया गया, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता है।

रिपोर्ट में अवर अभियंता पवन कुमार, सहायक अभियंता एसएन सिंह और रविन्द्र कुमार सिंह को दोषी बताया गया है जबकि निगरानी न करने के लिए अधिशासी अभियंता की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शासन को इन सभी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भेजी गई है।

SP_Singh AURGURU Editor