जिसकी हत्या में नरेंद्र तीन साल से जेल में था, वह ससुराल में सुकून से जीवन बिताता मिला

ट्रेन में झगड़े के बाद हत्या के आरोप में तीन साल से जेल में बंद अयोध्या निवासी नरेंद्र दुबे को अदालत ने रिहा कर दिया, क्योंकि जिसे मृत समझा गया था, वह युवक बिहार में जीवित पाया गया। वायरल वीडियो से खुलासा होने पर अदालत में पेश किया गया और न्यायालय ने पहचान की गलती मानते हुए नरेंद्र को दोषमुक्त कर दिया।

Jun 6, 2025 - 19:17
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जिसकी हत्या में नरेंद्र तीन साल से जेल में था, वह ससुराल में सुकून से जीवन बिताता मिला

-बिहार से आया वीडियो और पलट गया तीन साल पुराना केस

-तीन साल की कैद और अब मिली ज़िंदगी की सबसे बड़ी राहत

-आरके सिंह-

बरेली। बरेली में साल 2022 में ट्रेन में हुए झगड़े के दौरान हत्या के आरोप में जेल भेजे गए अयोध्या निवासी नरेंद्र दुबे की किस्मत तब बदल गई, जब बिहार के एक गांव से एक वायरल वीडियो सामने आया। वीडियो में वह युवक नजर आया, जिसे ट्रेन में हुए झगड़े में मृत घोषित कर दिया गया था। वह न केवल ज़िंदा निकला बल्कि अपनी ससुराल में सुकून से जीवन बिता रहा था।

ट्रेन में झगड़ा, फिर हत्या का आरोप और जेल की सलाखें

यह मामला 16 दिसंबर 2022 का है जब दिल्ली-अयोध्या एक्सप्रेस के एक कोच में मोबाइल चोरी को लेकर विवाद हुआ। तिलहर स्टेशन के पास किसी व्यक्ति को चलती ट्रेन से फेंके जाने की सूचना अयोध्या के आलोक द्वारा भेजे गए वीडियो से मिली। पुलिस ने मौके पर शव बरामद किया और घटनास्थल से पकड़े गए नरेंद्र दुबे को हत्या के आरोप में जेल भेज दिया।

शव की गलत पहचान बनी तीन साल की सज़ा की वजह

शव की पहचान बिहार निवासी एताब के रूप में उसके पिता और रिश्तेदारों द्वारा की गई थी। इसके आधार पर नरेंद्र पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। अजनी और दिलदार जैसे प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से अभियोजन ने केस मज़बूत किया और नरेंद्र दुबे को सजा हो गई। लेकिन अब वही 'मरा हुआ' एताब ज़िंदा मिला है।

स्वजन ने पहचान की, इसलिए अधिकारी दोषी नहीं

शाहजहांपुर के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता श्रीपाल वर्मा ने कोर्ट को बताया कि अभियोजन की मंशा सज़ा दिलवाने की नहीं, बल्कि सत्य को सामने लाने की होती है। शव की पहचान स्वजन द्वारा की गई थी, इसलिए जांच अधिकारी दोषी नहीं ठहराए जा सकते।

अपराध साबित करना अभियोजन की जिम्मेदारी-जज

अपर जिला जज पंकज कुमार श्रीवास्तव ने माना कि जब मृतक ही जीवित निकला तो अभियुक्त नरेंद्र दुबे को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने नरेंद्र दुबे को दोषमुक्त कर रिहा करने के आदेश दिए और कहा कि अभियोजन का उत्तरदायित्व है कि अपराध साबित करे, केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते।

यह था मामला

बरेली जीआरपी थाने पर 16 दिसंबर 2022 की रात तैनात सत्यवीर सिंह को जानकारी मिली कि दिल्ली-अयोध्या एक्सप्रेस के जनरल कोच डी-2 में दो लोगों के बीच मारपीट हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने दूसरे को तिलहर (शाहजहांपुर) स्टेशन के पास किसी स्थान पर चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया है। अयोध्या की पहाड़गंज कालोनी निवासी आलोक ने फोन से इसकी सूचना देते हुए घटना का वीडियो भी भेजा था।

रात करीब एक बजे ट्रेन बरेली जंक्शन पर पहुंची तो सत्यवीर सिंह ने ट्रेन से बाहर फेंकने वाले अयोध्या के खेमासराय गांव निवासी नरेन्द्र दुबे को पकड़ लिया। तिलहर पुलिस ने रेलवे ट्रैक के पास शव भी बरामद कर लिया। घटना के समय कोच में पास खड़े बाराबंकी निवासी अजनी व दिलदार के बयान के आधार पर व प्राथमिकी दर्ज करके नरेन्द्र को जेल भेज दिया गया था। मृतक की पहचान बिहार निवासी एताब के रूप में स्वजन ने की। न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया था।

SP_Singh AURGURU Editor