व्यापारियों की एसजीएसटी समस्याओं पर नेशनल चैम्बर ने प्रमुख सचिव के सामने रखीं छह अहम मांगें, शीघ्र समाधान का मिला भरोसा

आगरा। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग में व्यापारियों को आ रही व्यवहारिक और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए चैम्बर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधिमंडल ने प्रमुख सचिव राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग श्रीमती कामिनी चौहान से मुलाकात कर छह प्रमुख मांगों से संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन सौंपा। प्रमुख सचिव ने सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुनते हुए समस्याओं के शीघ्र सकारात्मक समाधान का आश्वासन दिया।

Jun 23, 2026 - 17:42
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व्यापारियों की एसजीएसटी समस्याओं पर नेशनल चैम्बर ने प्रमुख सचिव के सामने रखीं छह अहम मांगें, शीघ्र समाधान का मिला भरोसा
मंगलवार को आगरा के दौरे पर आईं प्रमुख सचिव राज्य वस्तु एवं सेवा कर विभाग श्रीमती कामिनी चौहान से मुलाकात कर प्रतिवेदन देते नेशनल चैंबर के पदाधिकारी।

प्रमुख सचिव श्रीमती कामिनी चौहान के आगरा आगमन पर एसजीएसटी कार्यालय, जयपुर हाउस में चैम्बर के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में चैम्बर के उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष एवं जीएसटी प्रकोष्ठ के चेयरमैन अमर मित्तल तथा कोषाध्यक्ष विनय मित्तल शामिल रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ई-वे बिल, इनवॉइस अथवा वाहन संख्या अंकित करने जैसी छोटी-छोटी तकनीकी त्रुटियों पर भी व्यापारियों से जुर्माना एवं जमानत राशि वसूली जाती है, जबकि इन गलतियों के पीछे कर चोरी की मंशा नहीं होती। ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई के बजाय राहत प्रदान की जानी चाहिए।

चैम्बर ने एसआईबी अधिकारियों के लिए स्पष्ट स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) लागू करने की मांग भी उठाई। इसमें जांच के स्पष्ट कारण बताने, उसकी प्रति उपलब्ध कराने, नोटिस से हल होने वाले मामलों में व्यापारी प्रतिष्ठान पर अनावश्यक जांच से बचने तथा केवल फर्जी डीलर के आधार पर पूरी व्यापारिक श्रृंखला को संदिग्ध न मानने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने माल रोकने के बाद लगने वाले अर्थदंड की अपील उसी शहर में करने की व्यवस्था की मांग की, जहां व्यापारी पंजीकृत है। वर्तमान व्यवस्था में दूसरे शहर जाकर बार-बार अपील करना व्यापारियों के लिए आर्थिक और समय की दृष्टि से अत्यंत कठिन बताया गया।

चैम्बर ने यह भी सुझाव दिया कि नोटिस का उत्तर देने की अंतिम तिथि निकल जाने पर करदाता को एडजर्नमेंट आवेदन देकर पोर्टल दोबारा खोलने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि वास्तविक कारणों से उत्तर न दे पाने वाले व्यापारियों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।

बैठक में पिछले 15 महीनों में अत्यधिक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के नाम पर बार-बार भेजे जा रहे निराधार नोटिसों का भी मुद्दा उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि एक सदस्य को चार नोटिस मिले, जिनमें से तीन विभाग स्वयं वापस ले चुका है। ऐसे नोटिसों से व्यापारियों का समय और संसाधन व्यर्थ हो रहे हैं।

चैम्बर ने यह भी सुझाव दिया कि ईमेल के साथ-साथ नोटिस की एक भौतिक प्रति भी संबंधित फर्म को भेजी जाए, ताकि विभाग को फर्म की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिलती रहे और भविष्य में फर्जी फर्मों से जुड़े मामलों में अन्य व्यापारियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

प्रमुख सचिव श्रीमती कामिनी चौहान ने प्रतिनिधिमंडल द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

SP_Singh AURGURU Editor