हिंदी साहित्य की साधना को मिला राष्ट्रीय सम्मान: प्रो. उमापति दीक्षित 'भारत-भास्कर सम्मान–2026' से अलंकृत
आगरा। केंद्रीय हिंदी संस्थान के ख्यातिलब्ध विद्वान, भाषाविद्, चिंतक और हिंदी साहित्य के समर्पित साधक प्रो. उमापति दीक्षित को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित 'भारत-भास्कर सम्मान' से सम्मानित किया गया है। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित बौद्ध शोध संस्थान में आयोजित 'श्री शीतल-प्रभा स्मृति सम्मान समारोह एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन' में उन्हें सम्मान-पत्र, प्रतीक चिह्न तथा 11 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई। समारोह में साहित्य, संस्कृति और भारतीय भाषाई परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके दीर्घकालीन योगदान की सराहना की गई।
यह समारोह साहित्य, संस्कृति और भारतीय वाङ्मय परंपरा को समर्पित एक भव्य आयोजन के रूप में संपन्न हुआ। देशभर से आए साहित्यकारों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान की।
समारोह के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक विरासत में निहित होती है। साहित्य समाज को दिशा देने वाली वह शक्ति है, जो बदलते समय में भी नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखती है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और साहित्य से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनते हैं।
कार्यक्रम का आयोजन संस्था की अध्यक्ष डॉ. शोभा त्रिपाठी तथा सचिव डॉ. सरला शर्मा 'आसमां' के नेतृत्व में उनके पूज्य माता-पिता की स्मृति में किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस समारोह का उद्देश्य साहित्यकारों का सम्मान करने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।
समारोह में पद्मश्री डॉ. अनिल रस्तोगी, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह, डॉ. हरिओम (आईएएस), रामकृष्ण स्वर्णकार (आईपीएस), अखिलेश निगम (आईपीएस), उग्रसेन धर द्विवेदी (आईएफएस), प्रो. हरिशंकर मिश्र, अमित मिश्रा, डॉ. राजीव शुक्ला तथा सीमा गुप्ता सहित साहित्य, शिक्षा, प्रशासन और समाज के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व उपस्थित रहे।