फतेहपुर सीकरी की ऐतिहासिक झील और पहाड़ियों पर एनजीटी सख्त, यूपी सरकार समेत आठ पक्षों को नोटिस; संरक्षण की लड़ाई को मिली बड़ी कानूनी बढ़त
आगरा के विश्व धरोहर क्षेत्र फतेहपुर सीकरी की ऐतिहासिक पहाड़ियों, सीकरी झील और खारी नदी के संरक्षण को लेकर दायर याचिका पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बड़ा कदम उठाया है। एनजीटी ने मामले को सुनवाई योग्य मानते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव समेत आठ विपक्षी पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ऐतिहासिक सीकरी झील को समाप्त कर खेती की जा रही है, खारी नदी का अस्तित्व मिटा दिया गया है और पहाड़ियों पर अवैध निर्माण के कारण पारिस्थितिकी तंत्र तथा विश्व धरोहर फतेहपुर सीकरी किला गंभीर खतरे में है।
आगरा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गुरुवार को फतेहपुर सीकरी की ऐतिहासिक पहाड़ श्रृंखला, सीकरी झील और उससे जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में उत्तर प्रदेश सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं।
यह मामला ओरिजनल एप्लिकेशन संख्या-389/2026, अजय प्रताप सिंह एडवोकेट बनाम मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य के रूप में एनजीटी में विचाराधीन है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सभी विपक्षीगणों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 निर्धारित की।
याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने सुनवाई के दौरान बताया कि आगरा के फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में विंध्य पर्वतमाला की दो समानांतर पहाड़ियां हैं, जिन्हें फतेहपुर सीकरी रेंज और बदरौली रेंज के नाम से जाना जाता है। इन दोनों पर्वत श्रृंखलाओं के बीच ऐतिहासिक सीकरी झील स्थित थी, जिसमें खारी नदी का पानी आता था।
उन्होंने न्यायालय को बताया कि ऐतिहासिक सीकरी झील को पूरी तरह नष्ट कर उसके क्षेत्र में खेती की जा रही है। वहीं फतेहपुर सीकरी रेंज पर स्थित विश्व प्रसिद्ध फतेहपुर सीकरी किले के आसपास लगातार अवैध निर्माण हो रहे हैं। झील के समाप्त होने और अवैध निर्माण के कारण क्षेत्र में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव लाल बलुआ पत्थर से निर्मित विश्व धरोहर फतेहपुर सीकरी किले पर पड़ रहा है। किले की सतह पर काली परत जमने जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि सीकरी झील का ऐतिहासिक महत्व अत्यंत प्राचीन है। बाबर और अकबर के काल के विवरणों में इसका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा वर्ष 1884 में प्रकाशित Statistical, Descriptive and Historical Account के वॉल्यूम-7 तथा वर्ष 1905 के आगरा गजेटियर में भी सीकरी झील और पहाड़ियों का विस्तृत वर्णन दर्ज है।
गजेटियर के अनुसार सीकरी झील लगभग दो मील चौड़ी और छह मील लंबी थी, जो फतेहपुर सीकरी रेंज और बदरौली रेंज के बीच फैली हुई थी।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि खारी नदी का अस्तित्व सीकरी चार हिस्सा, पत्सल, पाली किरावली और मोहम्मदपुर गांवों के क्षेत्र में लगभग समाप्त कर दिया गया है। पहाड़, झील और नदी मिलकर एक विशिष्ट पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करते थे, जिसके नष्ट होने से पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ा है। इसका प्रभाव न केवल फतेहपुर सीकरी क्षेत्र बल्कि ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) पर भी पड़ रहा है।
मामले में विपक्षी पक्षों के रूप में मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश सरकार, प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, प्रमुख सचिव, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग, प्रमुख सचिव, ग्राम्य विकास विभाग, जिलाधिकारी, आगरा, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा क्षेत्रीय प्रबंधक, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, आगरा को पक्षकार बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अधिवक्ता भंवरपाल सिंह जादौन उपस्थित हुए। उन्होंने विपक्षी संख्या 1 से 6 की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए न्यायालय से समय देने का अनुरोध किया।
एनजीटी ने सभी विपक्षी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए तथा मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 तय की।
सुनवाई के बाद अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने कहा कि वे फतेहपुर सीकरी की ऐतिहासिक पहाड़ियों, सीकरी झील और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण तथा पुनर्स्थापना के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका कहना है कि यह मामला केवल एक ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण का नहीं, बल्कि पर्यावरण, जल स्रोतों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।