पद्मश्री आचार्य चंदना को 'वीरायतन' की प्रेरणा आगरा से मिली थी
-आदर्श नंदन गुप्ता- आगरा। श्वेतांबर जैन समाज की पहली आचार्य, पद्मश्री चंदना जी का गत दिनों पुणे में गोलोकवास हो गया। उन्होंने समाजसेवा की जो क्रांति की, उसकी प्रेरणा उन्हें आगरा में ही अपने गुरु उपाध्याय अमर मुनि महाराज से मिली थी। आगरा के जैन श्रावकों के सहयोग के बिहार के राजगीर में जंगली पहाड़ियों पर उन्होंने वीरायतन की स्थापना की और शिक्षा, चिकित्सा केंद्र खोले। कई देशों में इसकी शाखाएं सेवा कार्य कर रही हैं।

आगरा के एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचीं आचार्य चंदना का फाइल फोटो।
श्वेतांबर जैन समाज के आचार्य पृथ्वीचंद महाराज के परम शिष्य थे उपाध्याय अमर मुनि जी महाराज। आगरा के राजामंडी स्थानक में उनके जीवन का सबसे लंबा प्रवास रहा था। इस प्रकार उनकी कर्मभूमि आगरा रही थी। यहीं पर श्वेतांबर जैन साध्वी चंदना जी ने समाजसेवा की प्रेरणा, उपाध्याय अमर मुनि जी से ली। उनके दिशा निर्देशन में भगवान महावीर के 2500 निर्वाणोत्सव पर सन् 1973 में बिहार के बीहड़ों में वीरायतन की स्थापना की। वहां विद्यालय, चिकित्सालयों की स्थापना की और वनवासियों को शिक्षित किया। देश भर में एक करोड़ से अधिक मरीजों की चिकित्सा इस संस्था द्वारा की जा चुकी है। 50 हजार से अधिक विद्यार्थियों की शिक्षा में योगदान रहा है। देश-विदेश के 10 हजार जैन परिवार वीरायतन संस्था से जुडे़ हुए हैं। उनके द्वारा भगवान महावीर की अहिंसा और करुणा का प्रचार -प्रसार किया जा रहा है।
वीरायतन 50 वर्ष तक सेवा करने के पर भारत सरकार ने उन्हें सन् 2022 में पद्मश्री से अलंकृत किया। जैन समाज में आचार्य पद प्राप्त करने वाली वे पहली साध्वी थीं।
'श्री अमर भारती' के संपादक मंडल में
आचार्य चंदना जी का आगरा से काफी जुड़ाव रहा। श्री प्रेमचंद जैन द्वारा प्रकाशित 'श्री अमर भारती' पत्रिका का सन् 1974 में महावीर निर्वाण विशेषांक प्रकाशित किया गया था, जिसे सानिध्य प्रदान किया था राष्ट्र संत उपाध्याय अमर मुनि महाराज ने। इसके संपादक मंडल में मुख्य संपादक मुनि श्री नेमिचंद्र जी, पं. विजय मुनि शास्त्री, प्रबंध संपादक श्रीचंद सुराना 'सरस', प्रतापचंद जैन और डॊ.चंदनलाल पाराशर थे। इस संपादक मंडल में साध्वी चंदना भी थीं।
नागरिक अभिनंदन से थीं अभिभूत
सूरसदन में 21 अप्रैल 2022 आचार्य चंदना जी का नागरिक अभिनंदन एस.एस.जैन संघ, न्यू राजामंडी कालोनी की ओर से किया गया था। इसमें अशोक जैन (ओसवाल), जगदीश प्रसाद जैन, डॊ.आरएस पारीक, डॊ.एमसी गुप्ता, प्रेमचंद जैन, प्रदीप जैन, संदेश जैन, सुशील जैन आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे थे। इसमें जैन समाज के सभी उपवर्गों ने एकजुटता दिखाते हुए आचार्य का अभिनंदन किया था। इसके अलावा भी वे समय-समय पर आगरा के विभिन्न कार्यक्रमों में आती रही थीं।Top of Form
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(लेखक साहित्यसेवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं।)