'पैसा, दिखावा और दौड़ नहीं, शांति का रास्ता आत्मचिंतन है', आगरा में मुनि समत्व सागर के 'वंडरफुल जैनिज़्म' ने युवाओं में भरा नया जोश

आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में रविवार को जैन धर्म पर आधारित प्रेरणादायी आध्यात्मिक श्रृंखला 'वंडरफुल जैनिज़्म' का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। पूज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित इस विशेष सत्र में युवाओं, युवतियों, पुरुषों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। जैन दर्शन, आध्यात्मिकता, आत्म-विकास और संतुलित जीवन के सूत्रों पर आधारित प्रवचन ने उपस्थित लोगों में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया। वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं को तनावमुक्त और मूल्यपरक जीवन जीने की दिशा दिखाने वाला अभियान है।

Jul 19, 2026 - 22:25
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'पैसा, दिखावा और दौड़ नहीं, शांति का रास्ता आत्मचिंतन है', आगरा में मुनि समत्व सागर के 'वंडरफुल जैनिज़्म' ने युवाओं में भरा नया जोश
निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में वंडरफुल जैनिज्म कार्यक्रम में प्रवचन देते जैन मुनि समत्व सागर महाराज। दूसरे चित्र में कार्यक्रम में मौजूद जनसमूह।

संयुक्त धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने कहा कि आज का मनुष्य धन, प्रतिष्ठा और दिखावे की दौड़ में लगातार भाग रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसे मानसिक शांति नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये और भौतिक सुख-सुविधाएं भी उस व्यक्ति को संतोष नहीं दे सकतीं, जिसके भीतर आत्मिक शांति का अभाव हो।

उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि आज का सबसे बड़ा संकट तनाव, अवसाद, करियर की चिंता और रिश्तों में बढ़ती दूरियां हैं। इन समस्याओं का समाधान केवल बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकने और आध्यात्मिक जीवनशैली अपनाने में है।

मुनि श्री ने बताया कि 'वंडरफुल जैनिज़्म' का उद्देश्य आधुनिक समाज, विशेषकर युवाओं को जैन दर्शन के माध्यम से संतुलित, अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देना है। उन्होंने क्रोध प्रबंधन, रात्रि भोजन त्याग के वैज्ञानिक लाभ, दिखावे से दूर रहने और आत्मसंयम अपनाने जैसे व्यावहारिक विषयों पर सरल एवं तार्किक ढंग से मार्गदर्शन दिया।

अपने प्रवचन में उन्होंने कहा, "हम सुबह पांच बजे जिम जाने के लिए समय निकाल लेते हैं, लेकिन भगवान और गुरु के लिए समय नहीं निकाल पाते। यह विचार करने का विषय है कि हम जीवन में क्या खो रहे हैं और क्या पा रहे हैं।" उनके इन विचारों ने उपस्थित लोगों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का संचालन विजय जैन शास्त्री ने किया। पूरे सत्र के दौरान युवाओं और बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। उपस्थित श्रद्धालुओं का कहना था कि मुनि श्री के प्रेरक विचारों ने उनमें नई ऊर्जा का संचार किया और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा दी।

इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, मुरारी लाल जैन, अनिल जैन, रमेश जैन, मुकेश जैन, सतेंद्र जैन, राजीव जैन, आशीष जैन, आशु जैन, चक्रेश जैन, रोहित जैन, विवेक जैन, अनिकेत जैन, आदिश जैन, गौरव जैन, सचिन जैन तथा मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित नमोस्तु शासन संघ, विभिन्न मंडलों के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor