20 लाख दो, वरना जेल जाओ, बसई जगनेर थाने पर गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा बवाल

आगरा के बसई जगनेर थाना क्षेत्र में दर्ज दुष्कर्म के एक मुकदमे को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। थाना प्रभारी पर आरोप है कि उन्होंने दो आरोपित युवकों को करीब 15 दिन तक अवैध हिरासत में रखा और उन्हें समय पर जेल नहीं भेजा गया। मामले में इंस्पेक्टर का एक कथित वायरल वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह स्वयं दोनों आरोपितों को 15 दिन तक थाने में रखने की बात कहते सुनाई दे रहे हैं। वहीं एक आरोपित के परिजनों ने पुलिस पर 20 लाख रुपये की मांग करने और शिकायत के बाद घर पहुंचकर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। मामला अब स्थानीय स्तर से निकलकर लखनऊ तक पहुंच गया है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

Jun 26, 2026 - 00:48
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20 लाख दो, वरना जेल जाओ, बसई जगनेर थाने पर गंभीर आरोप, वायरल वीडियो से मचा बवाल
बात करने पहुंचे सादा कपड़े पहने लोगों के पुलिसकर्मी होने का दावा।

15 दिन की हिरासत पर घिरा थाना, वायरल वीडियो बना चर्चा का केंद्र

आगरा। आगरा के बसई जगनेर थाने में मार्च 2026 में दुष्कर्म का एक मुकदमा दर्ज किया गया था। मुकदमे में राहुल, रवि और हरेश नामक तीन युवकों को आरोपित बनाया गया था। पुलिस ने राहुल और रवि को गिरफ्तार कर जेल भेजा, जबकि विवेचना के दौरान हरेश का नाम निकाल दिया गया। अब इसी मामले को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं कि राहुल और रवि को गिरफ्तारी के बाद करीब 15 दिन तक थाने में रखा गया और उन्हें नियमानुसार तत्काल न्यायालय में पेश नहीं किया गया। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि दोनों युवक इस दौरान अवैध हिरासत में थे।

मामले को और गंभीर तब माना जाने लगा जब इंस्पेक्टर धर्मेंद्र भाटी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में वह यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि दोनों आरोपित 15 दिन तक थाने में रहे। हालांकि वीडियो में किसी लेन-देन का प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इसी दौरान सौदेबाजी की कोशिशें चल रही थीं।

कोर्ट नहीं जाते तो जेल भी नहीं भेजे जाते

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि यदि उन्होंने न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दाखिल नहीं किया होता तो आरोपितों को जेल भी नहीं भेजा जाता। उनका कहना है कि पुलिस लगातार मामला टाल रही थी और थाने में ही दोनों युवकों को रोके हुए थी। परिजनों का आरोप है कि हिरासत के दौरान समझौते और पैसों को लेकर बातचीत चल रही थी। हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।

20 लाख रुपये मांगने का आरोप

जेल भेजे गए आरोपित रवि कुमार के भाई अवधेश कुमार ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनके भाई को 15 दिन तक थाने में रखा गया और परिवार पर 20 लाख रुपये देने का दबाव बनाया गया। अवधेश के अनुसार उनका परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। परिवार के पास केवल एक बीघा कृषि भूमि है, जिसमें चार भाइयों का हिस्सा है। ऐसे में इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके लिए असंभव था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और थाने के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सामने आ जाए तो सच्चाई स्वतः स्पष्ट हो जाएगी।

शिकायत के बाद ‘धमकाने’ पहुंचे सादा वर्दी वाले?

गुरुवार को मामले में नया मोड़ तब आया जब राहुल के परिजनों ने आरोप लगाया कि शिकायतें सार्वजनिक होने के बाद कुछ लोग सादा कपड़ों में उनके घर पहुंचे और उन्हें पुलिस से टकराव न लेने की सलाह दी। परिजनों का दावा है कि उनसे बयान बदलने और मामला शांत करने का दबाव बनाया गया। परिवार ने चुपके से उन लोगों का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है। वीडियो में घर के बाहर चारपाई पर बैठे कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं। परिजनों का दावा है कि ये पुलिसकर्मी थे, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब उठ रहे हैं बड़े सवाल

इस पूरे प्रकरण ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही हैं तो दो व्यक्तियों को 15 दिन तक थाने में रखने का कानूनी आधार क्या था? गिरफ्तारी के बाद नियमानुसार न्यायालय में पेश क्यों नहीं किया गया? वायरल वीडियो में की गई कथित स्वीकारोक्ति की वास्तविकता क्या है? क्या वास्तव में किसी प्रकार की धनराशि की मांग की गई थी? शिकायत के बाद परिजनों के घर पहुंचे लोगों की पहचान क्या है? थाने के सीसीटीवी फुटेज और जीडी (जनरल डायरी) रिकॉर्ड क्या बताते हैं?

लखनऊ तक पहुंचा मामला

मामले की शिकायत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार प्रकरण ने राजधानी लखनऊ तक प्रशासनिक हलकों का ध्यान खींचा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और लगातार सामने आ रहे आरोपों ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि उच्च अधिकारी इन आरोपों की जांच किस स्तर पर कराते हैं और क्या थाने के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज तथा संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।