राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर पायलट का केंद्र पर निशाना, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

आगरा में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मौजूदा जांच प्रक्रिया और एसआईटी गठन पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगा एक पोस्टर भी चर्चा में रहा, जिसमें भगवान श्रीराम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दर्शाया गया था। पायलट ने कहा कि यह मामला राजनीति नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा है।

Jul 11, 2026 - 17:40
Jul 11, 2026 - 17:52
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर पायलट का केंद्र पर निशाना, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
प्रेस से वार्ता करते काँग्रेस नेता सचिन पायलट।

आगरा। राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माता जा रहा है। शनिवार को आगरा पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र सरकार पर तीखे सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने के बजाय जवाब देने से बच रही है। कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग उठाई। उनका कहना था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच ही यह तय कर सकेगी कि कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है और किस स्तर पर चूक हुई।

प्रेस वार्ता के दौरान मंच के पीछे लगा एक पोस्टर भी चर्चा का केंद्र बन गया। पोस्टर में भगवान श्रीराम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उंगली पकड़कर राम मंदिर की ओर जाते हुए दर्शाया गया था। खास बात यह रही कि पोस्टर में भगवान श्रीराम की आकृति प्रधानमंत्री मोदी की तुलना में छोटी दिखाई गई। हालांकि, सचिन पायलट ने अपने संबोधन में पोस्टर का कोई जिक्र नहीं किया, लेकिन इसकी प्रस्तुति ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी।

‘सवाल पूछना हर नागरिक का अधिकार’

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे और कथित अनियमितताओं को लेकर सामने आ रही जानकारियों पर सरकार को देश की जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सवाल उठाना केवल विपक्ष का अधिकार नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

पायलट ने आरोप लगाया कि मौजूदा जांच प्रक्रिया से सच्चाई पूरी तरह सामने नहीं आएगी और कुछ लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना था कि जब तक जांच पूरी तरह निष्पक्ष और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त नहीं होगी, तब तक वास्तविक जिम्मेदारों की पहचान संभव नहीं है।

एसआईटी गठन पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि हर बड़े विवाद के बाद सरकार जांच समितियां और कमेटियां बनाकर समय निकालने की कोशिश करती है। पायलट ने आरोप लगाया कि यह केवल लीपापोती का प्रयास है, जबकि देश की जनता मामले की गहराई से और निष्पक्ष जांच चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल औपचारिकताएं पूरी करने के बजाय वास्तविक तथ्यों को सामने लाने की दिशा में काम करना चाहिए।

‘आस्था से जुड़ा है मामला’

सचिन पायलट ने कहा कि यह केवल आर्थिक अनियमितताओं का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि देशभर के भक्त भगवान राम के प्रति श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर में दान और चढ़ावा चढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए।

भाजपा को दिया जवाब

भाजपा की ओर से लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए सचिन पायलट ने कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल या चुनावी लाभ का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और विश्वास से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार को विपक्ष के सवालों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय जनता के सामने तथ्य रखने चाहिए। पायलट ने दोहराया कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे महत्वपूर्ण है और सरकार को लोगों की शंकाओं का समाधान करना चाहिए।