कंगना रनौत को अदालत में तलब करने की मांग खारिज: आगरा की एमपी-एमएलए कोर्ट ने वादी की याचिका ठुकराई, सेशन कोर्ट में देंगे चुनौती

आगरा। हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ किसानों के कथित अपमान और राजद्रोह से जुड़े मामले में स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने वादी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कंगना रनौत को न्यायालय में तलब कर उनका बयान दर्ज कराने की मांग की गई थी। वादी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कोर्ट के आदेश को लेकर सेशन कोर्ट में रिवीजन दाखिल करने की बात कही की है।

Aug 4, 2026 - 17:51
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कंगना रनौत को अदालत में तलब करने की मांग खारिज: आगरा की एमपी-एमएलए कोर्ट ने वादी की याचिका ठुकराई, सेशन कोर्ट में देंगे चुनौती
सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत।

वादी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने बताया कि स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने पुलिस जांच रिपोर्ट को अधूरी बताते हुए दाखिल उनके प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया। उनका कहना है कि इस आदेश के खिलाफ शीघ्र ही सेशन कोर्ट में रिवीजन याचिका दायर की जाएगी।

पुलिस जांच को बताया अधूरा

वादी के अनुसार, उन्होंने 6 जून 2026 को न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसमें कहा गया था कि न्यायालय ने धारा 225(1) के तहत थाना न्यू आगरा पुलिस को दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।

वादी का आरोप है कि पुलिस ने उनके तथा गवाहों के बयान तो दर्ज कर लिए, लेकिन कंगना रनौत का बयान लेने के बजाय उनकी अधिवक्ता अनसूया चौधरी का बयान दर्ज कर जांच आख्या न्यायालय में प्रस्तुत कर दी, जो विधिसम्मत नहीं है और जांच को अधूरा बनाती है।

कंगना को तलब कर बयान दर्ज कराने की थी मांग

प्रार्थना पत्र में न्यायालय से अनुरोध किया गया था कि कंगना रनौत को तलब कर उनका स्वयं बयान दर्ज किया जाए। वादी का तर्क था कि यदि भविष्य में न्यायालय कंगना रनौत के विरुद्ध कोई आदेश पारित करता है तो वह यह कह सकती हैं कि उन्होंने स्वयं पुलिस को कोई बयान नहीं दिया और उनकी अधिवक्ता ने क्या बयान दिया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

वादी का यह भी कहना है कि किसी अधिवक्ता को पक्षकार की ओर से बयान देने का अधिकार नहीं होता। अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल की पैरवी कर सकता है। स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए मामले में संज्ञान पर बहस के लिए 5 सितंबर 2026 की तिथि निर्धारित कर दी है।

पहले भी सेशन कोर्ट दे चुका है आदेश

वादी ने बताया कि इसी मामले को स्पेशल कोर्ट ने 6 मई 2025 को निरस्त कर दिया था। इसके बाद उन्होंने सेशन कोर्ट में रिवीजन दायर किया था।

सेशन कोर्ट ने 12 नवंबर 2025 को रिवीजन स्वीकार करते हुए माना था कि पुलिस की जांच रिपोर्ट अधूरी है। अपने आदेश में सेशन कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि जांच पूरी किए बिना सुनवाई नहीं की जा सकती और अवर न्यायालय को निर्देश दिया था कि पूरी प्रक्रिया पूरी कर विधि सम्मत आदेश पारित किया जाए।

वादी का आरोप है कि इसके बावजूद स्पेशल कोर्ट ने सेशन कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए उसी अधूरी जांच रिपोर्ट के आधार पर उनका प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, प्रीति गुप्ता तथा बी.एस. फौजदार उपस्थित रहे। वहीं कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सुधा प्रधान ने पक्ष रखा।

SP_Singh AURGURU Editor