पीएनसी इंफ्राटेक पर करोड़ों का भुगतान रोकने का आरोप, राजभवन के हस्तक्षेप के बाद जांच के आदेश

जल जीवन मिशन से जुड़े भुगतान विवाद का मामला राजभवन तक पहुंचा। कारोबारी गौरव कुमार जैन ने PNC Infratech के अधिकारियों पर 8.37 करोड़ रुपये भुगतान रोकने का आरोप लगाया। भुगतान मांगने पर दबाव और धमकी देने के भी आरोप लगाए गए। राज्यपाल सचिवालय के हस्तक्षेप के बाद गृह विभाग ने आगरा पुलिस कमिश्नरेट से जांच रिपोर्ट मांगी। कंपनी पक्ष का दावा है कि मामला अनुबंधीय/भुगतान विवाद का है और संबंधित मंचों पर पहले से विचाराधीन है। फिलहाल आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और मामला जांच के चरण में है।

Jun 21, 2026 - 00:55
 0
पीएनसी इंफ्राटेक पर करोड़ों का भुगतान रोकने का आरोप, राजभवन के हस्तक्षेप के बाद जांच के आदेश

भुगतान रोकने, दबाव बनाने और धमकी देने के आरोप, राज्यपाल सचिवालय के हस्तक्षेप के बाद गृह विभाग ने पुलिस कमिश्नरेट से मांगी रिपोर्ट

आगरा। जल जीवन मिशन परियोजना से जुड़ा भुगतान विवाद शासन स्तर तक पहुंच गया है।
देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर करोड़ों रुपये का भुगतान रोकने और शिकायतकर्ता को कथित रूप से धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। मामला इतना गंभीर हो गया कि इसकी शिकायत राज्यपाल सचिवालय तक पहुंची, जिसके बाद गृह विभाग ने आगरा पुलिस कमिश्नरेट को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं।

यह मामला राजस्थान के भरतपुर निवासी कारोबारी गौरव कुमार जैन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि उनकी फर्म अरिहंत ट्रेडिंग कंपनी और बाहुबली प्रोजेक्ट ने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पीएनसी इंफ्राटेक द्वारा दिए गए कार्यादेश के आधार पर कासगंज जिले के विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण कार्य पूरा किया था। आरोप है कि कार्य पूर्ण होने के बावजूद कंपनी ने भुगतान जारी नहीं किया, जिससे उनकी फर्म को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

8.37 करोड़ रुपये भुगतान रोकने का आरोप

राज्यपाल को भेजी गई शिकायत में गौरव कुमार जैन ने आरोप लगाया है कि कंपनी के कुछ अधिकारियों ने करीब 8.37 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित रखा। शिकायत में कंपनी के निदेशक टी.आर. राव, एवीपी पी.सी. गुप्ता, एजीएम आर.के. जैन, प्रोजेक्ट मैनेजर रवि यादव तथा पूर्व प्रोजेक्ट मैनेजर सतीश सरोहा का नाम लेते हुए आरोप लगाया गया है कि भुगतान की मांग करने पर उन्हें मानसिक दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ा।
हालांकि, इन आरोपों की अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी या सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है। मामला फिलहाल जांचाधीन है और आरोपों की सत्यता की जांच की जानी बाकी है।

राज्यपाल सचिवालय ने लिया संज्ञान

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय ने 16 अप्रैल 2026 को शिकायत का संज्ञान लेते हुए गृह विभाग को पत्र भेजा था। इसके बाद गृह (पुलिस) अनुभाग ने 27 मई 2026 को आगरा के पुलिस आयुक्त को पत्र जारी कर मामले की जांच कराने, तथ्यों का परीक्षण करने तथा नियमानुसार कार्रवाई कर रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए।
गृह विभाग द्वारा जारी पत्र की प्रतिलिपि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भी भेजी गई है। इससे संकेत मिलता है कि शासन स्तर पर मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।

कंपनी पक्ष की भी अलग दलील

सूत्रों के अनुसार, पीएनसी इंफ्राटेक के अधिकारियों ने इस विवाद को लेकर एमएसएमई और अन्य सक्षम विभागों में पहले से अपनी शिकायतें एवं पक्ष प्रस्तुत किए हैं। कंपनी से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि मामला मुख्य रूप से भुगतान और अनुबंधीय विवाद का है तथा इसका पुलिस विभाग से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जल जीवन मिशन से जुड़ा होने के कारण बढ़ी संवेदनशीलता

गौरतलब है कि जल जीवन मिशन केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से चल रही इस परियोजना में किसी भी प्रकार का भुगतान विवाद या ठेकेदारी विवाद सामने आने पर स्वाभाविक रूप से प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो जाती है।

अब आगरा पुलिस कमिश्नरेट को शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजनी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और आगे किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।