राम मंदिर पर सियासी संग्राम तेज: लखनऊ में सपा के खिलाफ लगे होर्डिंग, 'दिल में बाबर, मुंह में राम' लिखकर मुलायम-अखिलेश पर किया गया तीखा हमला
लखनऊ/मथुरा/बाराबंकी। उत्तर प्रदेश में राम मंदिर को लेकर सियासी घमासान अब पोस्टर (होर्डिंग) वॉर में बदल गया है। राजधानी लखनऊ में मंगलवार (14 जुलाई) को सुबह लोग जब घूमने के लिए निकले तो शहर के कई प्रमुख स्थानों पर समाजवादी पार्टी के खिलाफ होर्डिंग लगे देखकर चौंक गये। लखनऊ के अलावा यूपी के ही मथुरा और बाराबंकी शहर में भी इसी तरह के होर्डिंग लगे देखे गये। माना जा रहा है कि राज्य के अन्य शहरों में भी ऐसे पोस्टर लगे हो सकते हैं। इन होर्डिंग में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ बड़ा संदेश लिखा गया है— "दिल में बाबर, मुंह में राम"।
बताया जा रहा है कि लखनऊ में ये होर्डिंग हजरतगंज, परिवर्तन चौक, जीपीओ पार्क और आसपास के प्रमुख चौराहों पर लगाए गए, जहां से गुजरने वाले लोगों का ध्यान तुरंत इनकी ओर गया। होर्डिंग सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
बाराबंकी में भी इसी तरह के विवादित पोस्टर और होर्डिंग लगाए जाने का मामला सामने आया। सूचना मिलते ही समाजवादी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए। उन्होंने विरोध जताते हुए पोस्टर और होर्डिंग हटाकर फाड़ दिए। घटना के बाद कुछ देर के लिए क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। सपा नेताओं ने मामले की शिकायत पुलिस से की है। पुलिस पोस्टर लगाने वालों की पहचान करने और पूरे मामले की जांच में जुटी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ये होर्डिंग और पोस्टर कब लगाए गए और इसके पीछे कौन लोग हैं।
मथुरा के गोवर्धन रोड पर भी समाजवादी पार्टी को निशाना बनाते हुए कई स्थानों पर विवादित पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव की तस्वीरों के साथ बड़ा संदेश लिखा गया है— "दिल में बाबर, मुंह में राम"। वहीं एक अन्य पोस्टर पर "मुलायम सरकार की असलियत" शीर्षक देते हुए अयोध्या की हनुमानगढ़ी से जुड़े पुराने विवाद का उल्लेख किया गया है। पोस्टरों के सामने आने के बाद स्थानीय समाजवादी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कड़ी नाराजगी जताई है और इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित अभियान बताया है।
होर्डिंग्स में "मुलायम सिंह यादव की असलियत" शीर्षक के साथ 1990 के अयोध्या कारसेवक गोलीकांड का जिक्र किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाई गई थी। इसी घटनाक्रम का हवाला देते हुए समाजवादी पार्टी की राम मंदिर और भगवान राम के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए गए हैं।
होर्डिग्स में यह संदेश भी देने की कोशिश की गई है कि समाजवादी पार्टी अब राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए राम का नाम ले रही है, जबकि अतीत में उसका रुख अलग रहा है। होर्डिंग के जरिए सपा पर दोहरी राजनीति करने का आरोप लगाया गया है।
यह होर्डिंग ऐसे समय लगाए गए हैं, जब अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी लगातार भाजपा सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को घेर रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं और इसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय बताते रहे हैं।
दूसरी ओर भाजपा समर्थक खेमे का आरोप है कि समाजवादी पार्टी राम मंदिर के मुद्दे पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। इसी पृष्ठभूमि में इन होर्डिंग को सपा के आरोपों का राजनीतिक जवाब माना जा रहा है।
होर्डिंग सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। हालांकि, अभी तक यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन पोस्टरों को किसने लगवाया है। प्रशासन या पुलिस की ओर से भी होर्डिगों के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में होर्डिंग लगाने वाले व्यक्ति या संगठन को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।