व्यक्तिगत प्रकरण का राजनीतिक असर: कांग्रेस नेता पर लगे आरोपों से पार्टी असहज स्थिति में
आगरा। कांग्रेस पार्टी इन दिनों जिस प्रकार राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक पुनरुत्थान के लिए प्रयासरत है, ठीक उसी समय आगरा से सामने आया एक कांग्रेस नेता का निजी मामला स्थानीय स्तर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की छवि पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
पार्टी के महानगर उपाध्यक्ष जलालउद्दीन के खिलाफ दुराचार का जो मामला एक महिला द्वारा छह साल बाद दर्ज कराया गया है, उसने न केवल कांग्रेस की स्थानीय इकाई को असहज किया है, बल्कि कांग्रेस कार्यालय की गरिमा पर भी गंभीर सवाल उठा दिए हैं।
आरोप और वायरल 'निकाहनामा' के बीच उलझी कहानी
शिकायतकर्ता महिला का आरोप है कि वह पारिवारिक कलह के समय जलालउद्दीन के सम्पर्क में आई थी, जिसने मदद के बहाने उसे फंसाया और कांग्रेस कार्यालय (कलक्ट्रेट के पास स्थित तत्कालीन दफ्तर) में उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद लम्बे समय तक यह सिलसिला जारी रखा।
इसी के जवाब में जलालउद्दीन ने सोशल मीडिया पर एक निकाहनामा वायरल कर यह दावा किया कि आरोप लगाने वाली महिला उसकी पत्नी है और उससे उसे एक बेटा भी है। यह दावा पूरे मामले को व्यक्तिगत रिश्तों और कानूनी दावों के मकड़जाल में उलझा रहा है।
अब यह तय करना पुलिस और न्यायालय का कार्य है कि सच्चाई किस पक्ष में है, लेकिन सार्वजनिक विमर्श में यह घटना शहर कांग्रेस के लिए अवश्य ही एक असहज स्थिति पैदा कर रही है।
पार्टी ने झाड़ा पल्ला, लेकिन सवाल अभी भी बाकी हैं
शहर कांग्रेस अध्यक्ष अमित सिंह ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि इस घटना से पार्टी का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने जांच पूरी होने तक कोई पार्टी-स्तरीय कार्रवाई से इनकार किया है। लेकिन, मूल प्रश्न यह है कि यदि आरोप सही हैं और घटना पार्टी कार्यालय में हुई थी, तो पार्टी उस नैतिक जिम्मेदारी से कैसे मुक्त हो सकती है?
क्या कांग्रेस कार्यालय जैसा राजनीतिक स्थल निजी और आपत्तिजनक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो सकता है? क्या संगठन के वरिष्ठ पदों पर बैठे व्यक्तियों का आचरण पार्टी की जवाबदेही नहीं बनता?
यह विवाद विपक्ष, खासकर भाजपा को कांग्रेस पर हमलावर होने का अवसर दे सकता है। भाजपा और अन्य दल इसे पार्टी की आंतरिक गिरावट और चरित्रहीनता से जोड़कर प्रचारित कर सकते हैं।
नैतिकता और अनुशासन का सवाल
राजनीतिक दलों की शक्ति केवल उनके नेताओं की संख्या या घोषणापत्रों से नहीं, बल्कि उनके आंतरिक आचरण और नैतिक अनुशासन से आती है।
अगर कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी के स्थानीय नेता पार्टी दफ्तर का दुरुपयोग करते हैं, तो यह संपूर्ण संगठन के लिए शर्मनाक स्थिति है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कि महिला के आरोपों में कितनी सच्चाई है और वायरल निकाहनामा कितना प्रामाणिक, लेकिन इस समय कांग्रेस की छवि पर जो सवाल खड़े हो रहे हैं, उसका असर पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं के मनोबल से लेकर आमजन की धारणा तक पर पड़ेगा।
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