समाजवाद के बिना नहीं हो सकती तरक्की: कॉमरेड रमेश मिश्रा के स्मृति दिवस पर भारतीय अर्थव्यवस्था और विश्व परिदृश्य पर हुआ मंथन
आगरा। भारतीय कम्युनिस्ट आंदोलन के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय कॉमरेड रमेश मिश्रा के षष्ठम स्मृति दिवस पर गुरुवार को पचकुइयां स्थित माथुर वैश्य सभागार में 'वैचारिक मंथन-6' का आयोजन किया गया। ‘दुनिया की बदलती तस्वीर और भारतीय अर्थव्यवस्था के हालात’ विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी में देश के प्रख्यात अर्थशास्त्रियों, महिला आंदोलन के नेताओं, साहित्यकारों और किसान नेताओं ने मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, भारतीय अर्थव्यवस्था, महंगाई, सामाजिक असमानता और समाजवाद की प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में जनगीतों और क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से भी सामाजिक चेतना का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉमरेड रमेश मिश्रा के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद दिलीप रघुवंशी के नेतृत्व में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा), आगरा के कलाकारों ने जनगीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को वैचारिक और सांस्कृतिक वातावरण प्रदान किया।
समाजवाद के बिना किसी देश का समग्र विकास संभव नहीं
मुख्य वक्ता, प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. जया मेहता, जोशी-अधिकारी इंस्टीट्यूट ऑफ स्टडीज़, दिल्ली ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारतीय आर्थिक हालात पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि विश्व की आर्थिक व्यवस्था का गंभीर अध्ययन किया जाए तो स्पष्ट होता है कि कोई भी देश समाजवाद के सिद्धांतों के बिना वास्तविक और समावेशी विकास नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि आर्थिक असमानता और संसाधनों के असंतुलित वितरण से समाज में नई चुनौतियां पैदा हो रही हैं।
दुनिया बदलने में अपनी भूमिका तय करनी होगी
भारतीय महिला फेडरेशन की राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड निशा सिद्धू (दिल्ली), राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड अरुणा सिन्हा (दिल्ली) तथा प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड विनीत तिवारी (इंदौर) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि दुनिया की कुरीतियों और सामाजिक विषमताओं को दूर करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि यदि बदलाव आज नहीं होगा तो आने वाले समय में अवश्य होगा, लेकिन उसके लिए वैचारिक संघर्ष निरंतर जारी रहना चाहिए।
संस्मरणों में जीवंत हुई रमेश मिश्रा की स्मृतियां
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान किसान सभा की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य कॉमरेड ओम प्रकाश ने की। इस दौरान स्वर्गीय रमेश मिश्रा के पुत्र कॉमरेड नीरज मिश्रा ने उनके जीवन संघर्ष, सामाजिक प्रतिबद्धता और जनआंदोलनों से जुड़े कई संस्मरण साझा किए, जिन्हें सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे।
भाकपा नेताओं ने भी रखे विचार
सभा को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के जिला मंत्री कॉमरेड पूरन सिंह, एस. के. खोसला सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने देश की वर्तमान आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
क्रांतिकारी गीतों ने बांधा समां
कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में परमानन्द शर्मा के संगीत निर्देशन में इप्टा आगरा के कलाकारों ने जनवादी और क्रांतिकारी गीत प्रस्तुत किए। नाट्य पितामह राजेन्द्र रघुवंशी रचित गीत ‘लेनिन तुम्हें सलाम’, यदुराही का प्रसिद्ध गीत ‘जब तक रोटी के प्रश्नों पर रखा रहेगा भारी पत्थर’ तथा असलम खान द्वारा प्रस्तुत ‘महंगाई डायन खाए जात है’ ने श्रोताओं को खूब प्रभावित किया। गायन में आशुतोष गौतम, जय कुमार और बालेन्दू भदौरिया ने स्वर दिए, जबकि ढोलक पर संजय ने संगत की।
इनकी रही विशेष भूमिका
कार्यक्रम का संचालन दिलीप रघुवंशी ने किया, जबकि अंत में भाकपा के उप सचिव मोहन सिंह ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर हरिविलास दीक्षित, सरला जैन, कुमकुम रघुवंशी, प्रियंका मिश्रा, प्रोफेसर ज्योत्स्ना रघुवंशी, एम. पी. दीक्षित, धारमजीत, मनोज झा, भीकम सिंह कुशवाह, कोमल सिंह, निरोति लाल, करुणेश राजपूत, रामनाथ शर्मा, भारत सिंह और संग्राम सिंह सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, साहित्यकार, बुद्धिजीवी और विभिन्न जन संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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