प्लास्टिक और तार के जाल में फंसा अजगर, जिंदगी के लिए करता रहा संघर्ष, वाइल्डलाइफ़ एसओएस ने बचाई जान

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में वाइल्डलाइफ़ एसओएस ने दो अलग-अलग रेस्क्यू अभियान चलाकर एक आठ फुट लंबे अजगर और एक इंडियन वुल्फ स्नेक को सुरक्षित बचाया। अजगर प्लास्टिक की बोतल और टेलीफोन के तारों में बुरी तरह फंसकर घायल हो गया था, जबकि दूसरा सांप वॉशिंग मशीन के अंदर छिपा मिला। विशेषज्ञों ने इसे शहरीकरण और कचरा प्रबंधन की लापरवाही का गंभीर परिणाम बताया है।

Jul 13, 2026 - 14:50
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प्लास्टिक और तार के जाल में फंसा अजगर, जिंदगी के लिए करता रहा संघर्ष, वाइल्डलाइफ़ एसओएस ने बचाई जान
रेस्क्यू किया गया अजगर।

सिकंदरा में दो अलग-अलग रेस्क्यू ऑपरेशन, घायल अजगर का हुआ इलाज और वॉशिंग मशीन में फंसे इंडियन वुल्फ स्नेक को सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया

आगरा। सिकंदरा क्षेत्र में वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स यूनिट ने दो अलग-अलग और बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू अभियान चलाकर एक आठ फुट लंबे अजगर और एक इंडियन वुल्फ स्नेक को सुरक्षित बचाया। यह घटनाएं तेजी से बढ़ते शहरीकरण और लापरवाही से फेंके जा रहे प्लास्टिक व अन्य कचरे से वन्यजीवों पर मंडरा रहे खतरे को उजागर करती हैं।

पहली घटना में सिकंदरा क्षेत्र में एक विशाल इंडियन रॉक पायथन (अजगर) टेलीफोन के फेंके गए तारों और प्लास्टिक की बोतल में बुरी तरह उलझ गया था। करीब आठ फुट लंबा यह अजगर घायल अवस्था में मुश्किल से हिल-डुल पा रहा था। हर बार बाहर निकलने की कोशिश में तार उसके शरीर को और कसते जा रहे थे, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और सांस लेने में भी परेशानी होने लगी।

सूचना मिलते ही वाइल्डलाइफ़ एसओएस की रैपिड रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर अजगर को मुक्त कराया। इसके बाद उसे इलाज के लिए आगरा भालू संरक्षण केंद्र ले जाया गया, जहां पशु चिकित्सकों की टीम ने सर्जरी कर उसके शरीर में धंसे तार को निकाला और प्लास्टिक की बोतल से पूरी तरह आजाद कराया।

पशु चिकित्सकों ने अजगर की रेडियोग्राफिक जांच भी कराई, जिसमें राहत की बात यह रही कि उसकी हड्डियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था। हालांकि, उसके शरीर पर गहरे घाव हैं और फिलहाल वह विशेषज्ञों की निगरानी में उपचाराधीन है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।

वॉशिंग मशीन में छिपा मिला इंडियन वुल्फ स्नेक

इसी बीच सिकंदरा की एक हाउसिंग कॉलोनी में रहने वाले लोगों ने अपनी वॉशिंग मशीन के अंदर एक इंडियन वुल्फ स्नेक को देखा। सांप दिखाई देने के बाद लोगों में दहशत फैल गई और उन्होंने तत्काल वाइल्डलाइफ़ एसओएस हेल्पलाइन नंबर (+91 9917109666) पर संपर्क किया।

मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने वॉशिंग मशीन को सावधानी से खोला और सांप को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जांच में पाया गया कि उसे किसी प्रकार की चोट नहीं लगी थी। इसके बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।

कानूनी संरक्षण प्राप्त है अजगर को

आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में इंडियन रॉक पायथन (पायथन मोलुरस) को "नियर थ्रेटन्ड" यानी संकट के करीब की श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 की अनुसूची-1 के तहत इसे सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है।

क्या बोले अधिकारी और विशेषज्ञ

आगरा के डीएफओ एवं नेशनल चंबल सैंक्चुअरी प्रोजेक्ट के डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट, आईएफएस राजेश कुमार ने कहा कि प्राकृतिक आवासों के आसपास गैर-जिम्मेदाराना तरीके से फेंका गया कचरा जंगली जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। उन्होंने कहा कि वन विभाग और वाइल्डलाइफ़ एसओएस की त्वरित कार्रवाई से अजगर की जान बचाई जा सकी, लेकिन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कचरे का उचित निस्तारण बेहद जरूरी है।

वाइल्डलाइफ़ एसओएस के सह-संस्थापक एवं सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा कि इंसानों की लापरवाही की कीमत वन्यजीवों को चुकानी पड़ रही है। प्लास्टिक की बोतलें, तार और अन्य कचरा जानवरों के लिए खतरनाक जाल बन जाते हैं।

संस्था की सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच वन्यजीव इंसानी इलाकों के करीब आने को मजबूर हैं और ऐसे में जंगलों के आसपास फैला कचरा उनके लिए गंभीर खतरा बन गया है।

वाइल्डलाइफ़ एसओएस के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट्स के डायरेक्टर बैजू राज एम.वी. ने बताया कि सांप पारिस्थितिकी तंत्र में चूहों की आबादी को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि सांप दिखाई देने पर उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञों को सूचना दें।

वहीं, वाइल्डलाइफ़ एसओएस की पशु चिकित्सा सेवाओं के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. एस. इलयाराजा ने बताया कि जब अजगर को रेस्क्यू कर लाया गया, तब तार उसकी खाल में गहराई तक धंस चुका था और उसे सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो रही थी। फिलहाल उसका नियमित उपचार किया जा रहा है।