कंगना रनौत केस में पुलिस जांच पर फिर उठे सवाल, अधूरी जांच आख्या पर कोर्ट में तीखी बहस; अब 21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

आगरा। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत से जुड़े मामले में बुधवार को स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच आख्या को लेकर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। वादी पक्ष ने एक बार फिर जांच रिपोर्ट को अधूरा बताते हुए अदालत से स्वयं कंगना रनौत का बयान दर्ज कराने की मांग की, जबकि विपक्षी पक्ष ने अपना जवाब दाखिल कर आगे की बहस के लिए समय मांगा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित कर दी।

Jul 8, 2026 - 17:38
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कंगना रनौत केस में पुलिस जांच पर फिर उठे सवाल, अधूरी जांच आख्या पर कोर्ट में तीखी बहस; अब 21 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान कंगना रनौत पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुधा प्रधान ने वादी द्वारा 6 जून 2026 को प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर अपना जवाब दाखिल किया।

दरअसल, 6 जून 2026 को वादी पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने अदालत में दायर प्रार्थना पत्र में पुलिस द्वारा प्रस्तुत जांच आख्या को अधूरा बताया था। उनका तर्क था कि पुलिस ने जांच के दौरान स्वयं विपक्षी कंगना रनौत का बयान दर्ज नहीं किया, बल्कि उनकी अधिवक्ता का बयान लेकर जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर दी, जो विधिसम्मत नहीं है।

वादी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि कानून के अनुसार ऐसे मामले में न्यायालय स्वयं विपक्षी को तलब कर उसका बयान दर्ज कर सकता है, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके। उनका कहना था कि जब तक स्वयं विपक्षी का बयान दर्ज नहीं होता, तब तक उसकी अधिवक्ता को उसकी ओर से बयान देने का अधिकार नहीं माना जा सकता।

वादी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने यह भी कहा कि इसी महत्वपूर्ण पहलू की अनदेखी करते हुए अवर न्यायालय ने 6 मई 2025 को परिवाद खारिज कर दिया था। बाद में रिवीजन कोर्ट ने पुलिस की जांच आख्या को अधूरी मानते हुए रिवीजन स्वीकार किया और मामले में पुनः सुनवाई कर विधि के अनुरूप आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे।

सुनवाई के दौरान वादी पक्ष की ओर से अदालत में एक अलग प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया गया, जिसमें मामले के शीघ्र निस्तारण की मांग की गई। प्रार्थना पत्र में कहा गया कि विपक्षी पक्ष प्रत्येक तारीख पर कोई न कोई नया प्रपत्र दाखिल कर सुनवाई को लंबा खींचने का प्रयास कर रहा है, जिससे मामले का समयबद्ध निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इसलिए अदालत शीघ्र सुनवाई कर उचित आदेश पारित करे।

वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, बी.एस. फौजदार तथा प्रीति गुप्ता ने अदालत में अपने तर्क प्रस्तुत किए।

दूसरी ओर, विपक्षी पक्ष ने जवाब दाखिल करने के बाद आगे की बहस के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह ने विपक्ष की समय देने की याचना स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई 2026 की तारीख नियत कर दी।

SP_Singh AURGURU Editor