ब्रज रज उत्सव में राजस्थानी कलाकारों ने बिखेरी स्वागत-सत्कार और वीर भूमि की संस्कृति की महक
मथुरा। बृज रज उत्सव में धौलीप्याऊ रेलवे मैदान राजस्थान संस्कृति से महक उठा। राजस्थान से कोहिनूर लॉगा के पधारो म्हारे देश की प्रस्तुति ने समा बांध दिया।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, केंदीय संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ब्रज रज उत्सव का चौथा दिन था।
शुक्रवार को दिन में युवा गतिविधियां रही, उत्सव की संध्या राजस्थान के नाम रही। कोहिनूर लॉगा की टीम के कलाकारों ने उत्सव का सम्पूर्ण माहौल राजस्थानी बना दिया। शुरुआत केसरिया बालम पधारो म्हारे देश से की। इसके बाद कलाकारों ने एक के बाद एक प्रस्तुति से राजस्थानी संस्कृति का रंग बिखेर दिया। राजस्थानी नृत्य पर जमकर तालियों की गड़गड़ाहट होती रही।
राजस्थान भूमि की संस्कृति की बात की। कभी ढोला प्रस्तुत किया तो कभी चरी नृत्य,भवाई नृत्य,मटका भवाई और नींबूडा नींबूडा नींबूडा जैसी प्रस्तुतियों से समा बांध दिया।
इस मौके पर राजस्थानी कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए सांसद हेमा मालिनी और उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र मौजूद रहे। उन्होंने कलाकारों को सम्मानित भी किया। इससे पूर्व मंच पर ब्रज संस्कृति के लोककला की झलक नजर आई। महावीर सिंह चाहर की टीम ने ब्रज के लोकगीत प्रस्तुत किए।
खेमचंद यदुवंशी की नौटंकी लोकसंगीत गायन की जमकर सराहना हुई। सौरभ चतुर्वेदी का ध्रुपद गायन हवेली संगीत ने लोगों को चकित किया।
आज के कार्यक्रम
माधुरी शर्मा के भजन, राजेश शर्मा के लोकगीत, लोकनृत्य,मधुकर के भजन साढ़े चार से साढ़े सात बजे तक प्रस्तुत होंगे। तदोपरांत श्रीराम भारतीय कला केंद्र की प्रस्तुति होगी।