गोकुलपुरा की गौरवशाली विरासत को नया जीवन, श्री गणगौर दरवाजे का निर्माण शुरू

आगरा के गोकुलपुरा क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान श्री गणगौर दरवाजे के निर्माण कार्य का शुक्रवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। 22.29 लाख रुपये की लागत से बनने वाले इस भव्य द्वार का शिलान्यास उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

Sep 4, 2026 - 17:23
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गोकुलपुरा की गौरवशाली विरासत को नया जीवन, श्री गणगौर दरवाजे का निर्माण शुरू
श्री गणगौर दरवाजे के निर्माण के लिए शिलान्यास करते कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय।

वैदिक मंत्रोच्चार और ढोल-नगाड़ों के बीच ऐतिहासिक शुरुआत, मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने रखा नींव का पत्थर

आगरा। गोकुलपुरा क्षेत्र की प्राचीन धरोहर, गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के प्रतीक श्री गणगौर दरवाजे को अब एक नया और भव्य स्वरूप मिलने जा रहा है। शुक्रवार को इस ऐतिहासिक द्वार के निर्माण कार्य का विधिवत शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और पूर्ण धार्मिक विधि-विधान के साथ किया गया। डॉ. अभय यादव क्लिनिक के सामने स्थित स्थल पर आयोजित भूमि पूजन कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और अपने कर-कमलों से निर्माण कार्य का शिलान्यास किया।

आगरा विकास प्राधिकरण की पथकर निधि से 22.29 लाख रुपये की लागत से श्री गणगौर दरवाजे का निर्माण कराया जाएगा। इसे आकर्षक, भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान करने की योजना है। निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही क्षेत्रवासियों में उत्साह और खुशी का माहौल देखने को मिला। गोकुलपुरा क्षेत्र में भूमि पूजन के अवसर पर मानो उत्सव जैसा वातावरण बन गया।

सांस्कृतिक पहचान और विरासत को संरक्षित रखना हमारा संकल्प

भूमि पूजन के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि श्री गणगौर दरवाजा केवल ईंट-पत्थरों से बनने वाला एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की प्राचीन धरोहर, अटूट आस्था और गौरवशाली परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित एवं अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि 22.29 लाख रुपये की लागत से बनने वाला श्री गणगौर दरवाजा गोकुलपुरा की शान में चार चांद लगाएगा। इसका भव्य स्वरूप क्षेत्र की पहचान को और मजबूत करेगा। उन्होंने क्षेत्र में विकास कार्यों की गति को लगातार बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

वैदिक मंत्रोच्चार से भक्तिमय हुआ माहौल

कार्यक्रम की शुरुआत विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की गई। धार्मिक अनुष्ठान और भूमि पूजन के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। इसके बाद मुख्य अतिथि योगेन्द्र उपाध्याय ने शिलापट्ट का अनावरण कर निर्माण कार्य की आधिकारिक शुरुआत की। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने स्थानीय निवासियों और क्षेत्रवासियों के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ दिखाई दिया। ढोल-नगाड़ों की गूंज और फूलों की वर्षा के बीच क्षेत्रीय लोगों ने कैबिनेट मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत और अभिनंदन किया।

क्षेत्रवासियों ने जताया उत्साह, बताया ऐतिहासिक पहल

स्थानीय नागरिकों और गणमान्य लोगों ने श्री गणगौर दरवाजे के निर्माण को क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल बताया। उनका कहना था कि यह द्वार केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि गोकुलपुरा की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को नई मजबूती देने वाला कार्य है। स्थानीय नेताओं और क्षेत्रवासियों ने इस पहल के लिए मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। लोगों का मानना है कि भव्य स्वरूप में तैयार होने के बाद यह द्वार क्षेत्र की पहचान के रूप में और अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।

बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में प्रमुख रूप से कैबिनेट मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, डॉ. आलोकिक उपाध्याय, संरक्षक दिनेश पंडित, दाऊ दयाल पंडित, महेश चंद, रमेश चंद्र, युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष ललित शर्मा, मनीष वर्मा, भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेश प्रजापति, पार्षद बद्री प्रसाद माहौर, राजीव वर्मा, नरेश वर्मा, रिंकू वर्मा, गोविन्द वर्मा, चिंकी नरवार, कालू यादव, अंकुर ठाकुर, रवि वर्मा, आजाद फकीरा, संजय लहरी और गौरव वर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इसके अलावा आगरा विकास प्राधिकरण के अधिकारी और भारी संख्या में क्षेत्रीय लोग कार्यक्रम में शामिल हुए।

श्री गणगौर दरवाजे के निर्माण कार्य की शुरुआत के साथ ही क्षेत्रवासियों की लंबे समय से जुड़ी सांस्कृतिक भावनाओं को नया सम्मान मिलने की उम्मीद जगी है। भव्य और आकर्षक स्वरूप में तैयार होने के बाद यह द्वार न केवल गोकुलपुरा की पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्र की प्राचीन विरासत और गौरवशाली परंपरा का भी प्रतीक बनेगा।