रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में आईआईटी रोपड़ की ‘ड्रीम्स’ परियोजना पर मंथन: रेयर अर्थ पर निर्भरता घटाने को तेज होगा शोध, कुलपति ने दिए निर्देश
-रमेश कुमार सिंह- बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय (एमजेपीआरयू) और आईआईटी रोपड़ के संयुक्त सहयोग से संचालित ‘ड्रीम्स’ शोध परियोजना की प्रगति को लेकर बुधवार को महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह ने अब तक के शोध कार्यों पर संतोष व्यक्त करते हुए नवाचार और उपयोगिता आधारित अनुसंधान पर विशेष जोर दिया।
कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने शोधकर्ताओं और सह-प्रमुख अन्वेषकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के कार्य देश की ऊर्जा और सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किए जाएं, ताकि रेयर अर्थ मैटेरियल पर निर्भरता कम की जा सके। उन्होंने आगे की कार्य योजना को और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक उपकरणों की खरीद हेतु प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए।
यह शोध परियोजना नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की ‘पेयर योजना’ के अंतर्गत स्वीकृत है, जिसमें एमजेपीआरयू और आईआईटी रोपड़ के अलावा देश के विभिन्न राज्यों के छह अन्य विश्वविद्यालय भी सहभागी हैं। परियोजना का मुख्य उद्देश्य उन्नत मैटेरियल का विकास करना है, जिससे ऊर्जा और सुरक्षा क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता को मजबूती मिल सके।
परियोजना के प्रमुख अन्वेषक स्वयं कुलपति प्रो. के.पी. सिंह हैं, जबकि विश्वविद्यालय के छह अन्य शिक्षक सह-प्रमुख अन्वेषक के रूप में जुड़े हुए हैं। परियोजना के क्रियान्वयन के लिए पांच अनुसंधान कर्मियों की नियुक्ति की गई है, जिनमें डॉ. धर्मेन्द्र सिंह राघव और डॉ. कुमकुम गंगवार रिसर्च एसोसिएट के रूप में तथा नितिन रत्नाकर, विशेष गंगवार और सोनाली सिंह प्रोजेक्ट एसोसिएट के रूप में कार्य कर रहे हैं।
समीक्षा बैठक में प्रोफेसर नवीन कुमार और डॉ. ब्रजेश कुमार सहित सभी अनुसंधान कर्मी उपस्थित रहे। इस दौरान शोधार्थियों ने अब तक किए गए कार्यों की पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विस्तृत जानकारी दी और आगामी योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया।
बैठक के अंत में सभी शोध कर्मियों और सह-प्रमुख अन्वेषकों ने कुलपति के मार्गदर्शन में परियोजना के उद्देश्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।