रोहिलखंड विश्वविद्यालय की 5जी एंटीना परियोजना को 17.58 लाख का अनुदान, मल्टीबीम तकनीक से सुधरेगी नेटवर्क क्षमता
बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय की 5जी संचार तकनीक से जुड़ी शोध परियोजना को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश ने मंजूरी दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक गंगवार की अगुवाई वाली इस परियोजना के लिए करीब 17.58 लाख रुपये का अनुसंधान अनुदान स्वीकृत किया गया है। तीन वर्ष की इस परियोजना में 5जी संचार प्रणालियों के लिए मेटासर्फेस आधारित मल्टीबीम एंटीना विकसित किया जाएगा, जिससे नेटवर्क की क्षमता, कवरेज, स्पेक्ट्रम दक्षता और डेटा संचार की गति में सुधार की उम्मीद है।
परियोजना के प्रमुख अन्वेषक डॉ. दीपक गंगवार ने बताया कि परियोजना का नाम “डिजाइन एंड डेवलपमेंट ऑफ मेटासर्फेस बेस्ड मल्टीबीम एंटीना फॉर 5जी एप्लीकेशंस” है। इसमें अनुप्रयुक्त गणित विभाग के प्रो. एम. एल. गंगवार और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डॉ. इंदरप्रीत कौर सह-अन्वेषक हैं।
परियोजना के तहत ऐसा मेटासर्फेस आधारित मल्टीबीम एंटीना विकसित किया जाएगा, जो एक साथ कई दिशाओं में उच्च दक्षता के साथ सिग्नल भेजने और प्राप्त करने में सक्षम होगा। शोध के दौरान उन्नत मेटासर्फेस तकनीक, फेज ग्रेडिएंट संरचनाओं और आधुनिक माइक्रोवेव इंजीनियरिंग के सिद्धांतों का उपयोग किया जाएगा। एंटीना के डिजाइन और सिमुलेशन के बाद उसका निर्माण एवं परीक्षण भी किया जाएगा।
डॉ. दीपक गंगवार ने कहा कि भविष्य की 5जी और 6जी संचार प्रणालियों में उच्च डेटा दर, कम विलंबता और बेहतर नेटवर्क कवरेज के लिए उन्नत एंटीना तकनीक महत्वपूर्ण है। प्रस्तावित तकनीक इन जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो सकती है। इससे देश में स्वदेशी दूरसंचार तकनीक के विकास को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस परियोजना से वायरलेस संचार, स्मार्ट सिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रक्षा एवं उपग्रह संचार तथा अगली पीढ़ी की मोबाइल संचार प्रणालियों के लिए तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। परियोजना के दौरान शोधार्थियों और विद्यार्थियों को प्रोटोटाइप विकास तथा अत्याधुनिक अनुसंधान में प्रत्यक्ष भागीदारी का अवसर भी मिलेगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति और प्रशासन ने परियोजना को स्वीकृति मिलने पर डॉ. दीपक गंगवार और उनकी टीम को बधाई दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे संस्थान की अनुसंधान एवं नवाचार क्षमता को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।