संस्कार भारती ब्रज प्रांत को मिला अनुभवी नेतृत्व: वरिष्ठ चित्रकार प्रो. चित्रलेखा सिंह बनीं प्रांतीय संरक्षक
भारतीय कला, साहित्य और शिक्षा जगत की वरिष्ठ हस्ती प्रो. डॉ. चित्रलेखा सिंह को संस्कार भारती ब्रज प्रांत का प्रांतीय संरक्षक घोषित किया गया है। वर्ष 1975 से संगठन से जुड़ी प्रो. सिंह के कला, शिक्षा, शोध और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए उन्हें यह दायित्व सौंपा गया है।
आगरा। भारतीय कला, संस्कृति और साहित्य के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकीं वरिष्ठ चित्रकार एवं साहित्यकार प्रोफेसर डॉ. श्रीमती चित्रलेखा सिंह को संस्कार भारती ब्रज प्रांत का प्रांतीय संरक्षक घोषित किया गया है। उनके मनोनयन से कला एवं सांस्कृतिक जगत में हर्ष का वातावरण है। संस्कार भारती ब्रज प्रांत के महामंत्री नन्द नन्दन गर्ग ने इसकी औपचारिक जानकारी देते हुए बताया कि संगठन ने उनके लंबे अनुभव, कला साधना तथा सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए यह महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा है।
प्रो. डॉ. चित्रलेखा सिंह उत्तर भारत की प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, चित्रकार और साहित्यकार हैं। वह डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के ललित कला विभाग की पूर्व अधिष्ठाता (डीन) रह चुकी हैं। इसके अलावा वह आगरा कॉलेज, आगरा के चित्रकला विभाग की पूर्व अध्यक्ष, ललित कला संस्थान, आगरा की संस्थापक निदेशक तथा मंगलायतन विश्वविद्यालय, अलीगढ़ की कुलपति भी रह चुकी हैं। 81 वर्ष की आयु में भी वह कला, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर सक्रिय हैं। वर्ष 1975 से वह संस्कार भारती से जुड़ी हुई हैं और संगठन की विभिन्न गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं।
प्रो. डॉ. चित्रलेखा सिंह का शैक्षणिक योगदान भी अत्यंत उल्लेखनीय रहा है। उनके निर्देशन में अब तक 100 शोधार्थियों को पीएचडी तथा 215 विद्यार्थियों को एम.फिल. की उपाधि प्राप्त हो चुकी है। उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं कलात्मक योगदान के लिए वर्ष 1998 में एडवाइजरी बोर्ड ऑफ अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट ने उन्हें मानद सदस्यता से सम्मानित किया था। इसके अतिरिक्त उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।
उनकी कला का दायरा केवल भारत तक सीमित नहीं है। उनकी चित्रकृतियां भारत के अनेक महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के साथ-साथ अमेरिका, कनाडा, बांग्लादेश, नेपाल, जर्मनी और रूस के विभिन्न कला संग्रहों में भी सुरक्षित हैं। साहित्य के क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत समृद्ध है और अब तक उनकी 56 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
प्रो. डॉ. चित्रलेखा सिंह ने केवल कला और शिक्षा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अनुशासन एवं राष्ट्रसेवा में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। वह राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) में कैप्टन रह चुकी हैं तथा उन्हें भारत सरकार के रक्षा सचिव द्वारा प्रदान किए गए प्रथम स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया जा चुका है।
उनके प्रांतीय संरक्षक बनाए जाने पर संस्कार भारती और कला जगत से जुड़े अनेक पदाधिकारियों, कलाकारों, शिक्षाविदों और साहित्यकारों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।