व्यंग्य के शिखर पर ‘सरल’ की चमक! संपत सरल को मिला पचासवां काका हाथरसी सम्मान
नई दिल्ली। पद्मश्री हास्य कवि ऋषि काका हाथरसी की स्मृति में आयोजित देश के प्रतिष्ठित काका हाथरसी सम्मान का पचासवां अलंकरण इस वर्ष सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार संपत सरल को प्रदान किया गया। राजधानी दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में हुए इस भव्य समारोह में देशभर के कवि, साहित्यकार और रसिकजन एकत्र हुए। समारोह की गरिमा तब और बढ़ गई जब पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पद्म विभूषण डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने स्वयं संपत सरल को एक लाख रुपये की सम्मान राशि, सम्मान पत्र, श्रीफल, दुशाला और पुष्पहार सहित ‘हास्य रत्न’ की उपाधि से अलंकृत किया।
व्यंग्य को आत्मचिंतन के रूप में लें- डॊ. मुरली मनोहर जोशी
सम्मान समारोह में डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने संपत सरल की व्यंग्य चेतना की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि व्यंग्य समाज का आईना है, इसे आलोचना नहीं आत्मचिंतन के अवसर के रूप में लेना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति केवल दोष दिखाने का माध्यम नहीं, समाधान सुझाने की भी जिम्मेदारी उठाए। डॉ. जोशी ने अन्य लेखकों से भी आग्रह किया कि वे संपत सरल की तरह अपने लेखन में दायित्व बोध का समावेश करें।
व्यंग्य-पाठ से गूंजा सभागार
पुरस्कार ग्रहण के बाद संपत सरल ने अपने प्रसिद्ध व्यंग्य लेखों का पाठ किया, जिससे सभागार में ठहाकों की गूंज छा गई। उनके व्यंग्य समाज की विसंगतियों को हास्य की शैली में उजागर करते रहे। इस अवसर पर देश के प्रख्यात कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र शर्मा, पद्मश्री डॉ. अशोक चक्रधर, कवि महेन्द्र अजनबी, कवि वेदप्रकाश वेद, कवि दीपक गुप्ता, कवयित्री मीरा कुमार और कवि चिराग जैन ने अपनी रचनाओं से कार्यक्रम को रोशन किया।
दिल्ली से आगरा तक के साहित्यकारों का संगम
कार्यक्रम की अध्यक्षता अमेरिका से आए ट्रस्ट अध्यक्ष अशोक गर्ग ने की, जबकि संचालन चिराग जैन ने बड़े प्रभावशाली ढंग से किया। मंच पर सेवानिवृत्त कमिश्नर डॉ. आर.के. भटनागर भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर दिल्ली, हाथरस और आगरा से अनेक साहित्यकारों की उपस्थिति रही, जिनमें डॉ. रमाकांत भटनागर, कवि विनीत चौहान, गजेंद्र सोलंकी, डॉ. प्रवीण शुक्ल, आगरा से साहित्यसेवी आदर्श नंदन गुप्ता, पूनम वर्मा, पी.के. आज़ाद, राहुल शेष, ओम रायज़ादा, रचना गोयल, अंकुर इंदु अग्रवाल, श्रुति जोशी, उपेन्द्र पांडे, डॉ. बागेश्री चक्रधर, सरिता बिश्नोई, आर.के. तिवारी, डॉ. सुजय शाद, के.एन. झा, राम गर्ग, किशोर कौशल, पवन अग्रवाल, शरणजीत सिंह यादव, सुरेश मित्तल, अभिनंदन गुप्ता, मधु अग्रवाल, डॉ. दर्शिनीप्रिया और राकेश कुमार प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन पर अशोक गर्ग ने सभी अतिथियों, कवियों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि काका हाथरसी की परंपरा व्यंग्य को जनचेतना का माध्यम बनाए रखने की प्रेरणा देती रहेगी।