4.37 करोड़ के फर्जी कारोबार का खेल, आगरा में 79 लाख की जीएसटी चोरी का खुलासा
आगरा में फर्जी जीएसटी फर्म के जरिए 78.81 लाख रुपये की कर चोरी का मामला सामने आया। ‘धर्मेंद्र ट्रेडर्स’ नामक फर्म संजय प्लेस के जिस पते पर दर्ज थी, वहां उसका कोई अस्तित्व नहीं मिला। पंजीकरण में लगाए गए बिजली बिल और अन्य दस्तावेज फर्जी पाए गए। फर्म ने 2023-24 में 4.37 करोड़ रुपये का कारोबार दिखाया था। बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए कर देनदारी समायोजित करने का आरोप। लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज, पुलिस बैंक खातों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच में जुटी। अधिकारियों को बड़े फर्जी जीएसटी नेटवर्क की आशंका है।
संजय प्लेस के पते पर मिली ही नहीं फर्म, फर्जी बिजली बिल और बोगस आईटीसी के सहारे करोड़ों का कारोबार दिखाने का आरोप, पुलिस खंगाल रही बैंक खाते और डिजिटल रिकॉर्ड
आगरा। ताजनगरी में फर्जी जीएसटी पंजीकरण के जरिए सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना लगाने वाले एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। राज्य कर विभाग की विस्तृत जांच में सामने आया कि एक कागजी फर्म बनाकर करीब 79 लाख रुपये के कर की चोरी की गई है। मामले को गंभीर वित्तीय अपराध मानते हुए विभाग की शिकायत पर थाना लोहामंडी में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जांच में जुट गई है।
संजय प्लेस के पते पर नहीं मिली फर्म
जांच के मुताबिक आरोपी ने संजय प्लेस स्थित एक पते पर ‘धर्मेंद्र ट्रेडर्स’ नाम से जीएसटी पंजीकरण कराया था। नियमित सत्यापन के दौरान जब राज्य कर विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो वहां फर्म का कोई अस्तित्व नहीं मिला। न तो कार्यालय मिला और न ही किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि दिखाई दी। आसपास के दुकानदारों और स्थानीय लोगों ने भी ऐसी किसी फर्म या उसके संचालक के बारे में जानकारी होने से इनकार कर दिया।
बिजली बिल की जांच में खुली फर्जीवाड़े की परत
विभागीय अधिकारियों ने पंजीकरण के दौरान जमा कराए गए दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। इस दौरान फर्म के नाम पर प्रस्तुत बिजली बिल संदिग्ध पाया गया। रिकॉर्ड मिलान में पता चला कि बिल में दर्ज उपभोक्ता संख्या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि जीएसटी पंजीकरण हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था।
मोबाइल नंबरों की पड़ताल में भी मिला झोल
जांच को आगे बढ़ाते हुए अधिकारियों ने फर्म से जुड़े मोबाइल नंबरों की पड़ताल की। एक नंबर बंद मिला, जबकि दूसरा नंबर किसी ऐसे व्यक्ति का निकला जिसका फर्म से कोई संबंध नहीं था। संबंधित व्यक्ति ने पूछताछ में स्पष्ट कहा कि वह धर्मेंद्र ट्रेडर्स नामक किसी संस्था को नहीं जानता। इससे विभाग का संदेह और गहरा गया कि पूरी फर्म केवल कागजों पर ही संचालित की जा रही थी।
4.37 करोड़ का कारोबार दिखाकर लिया कर लाभ
राज्य कर विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में धर्मेंद्र ट्रेडर्स ने लगभग 4.37 करोड़ रुपये का कारोबार दर्शाया। इस कारोबार पर करीब 78.81 लाख रुपये का कर बनता था। आरोप है कि कर जमा करने के बजाय संदिग्ध और फर्जी फर्मों से बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्राप्त कर देनदारी का समायोजन कर लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान माल की खरीद-बिक्री, परिवहन अथवा वास्तविक व्यापार से जुड़े कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले। केवल ई-वे बिल और इनवॉइस के जरिए कागजी लेन-देन दर्शाकर कर लाभ लेने की कोशिश की गई।
नोटिस भेजे गए, लेकिन नहीं मिला जवाब
विभाग ने आरोपी को कई बार नोटिस और समन जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। बावजूद इसके न तो कोई जवाब दिया गया और न ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। विभाग के समक्ष कोई प्रतिनिधि भी उपस्थित नहीं हुआ। लगातार अनुपस्थिति और दस्तावेजी खामियों के चलते फर्म का जीएसटी पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।
बड़े नेटवर्क की आशंका, कई फर्में जांच के दायरे में
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस और कर विभाग अब इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे सक्रिय नेटवर्क की तलाश में जुटे हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, आईपी एड्रेस, ई-मेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को खंगाल रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला किसी संगठित गिरोह या बड़े फर्जी जीएसटी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है, जो कागजी कंपनियां बनाकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल खेल रहा है। इसी संभावना को देखते हुए अन्य संदिग्ध फर्मों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े सुराग पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर सकते हैं। यदि आरोप साबित होते हैं तो इस मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आगरा में सामने आए हालिया आर्थिक अपराधों में इसे सबसे बड़े जीएसटी फर्जीवाड़ों में से एक माना जा रहा है।