आगरा कॉलेज में साइबर फ्रॊड पर सेमिनारः 2025 में अब तक 22 हजार करोड़ के फ्रॊड दर्ज
आगरा। प्रदेश सरकार के मिशन शक्ति चरण 5.0 विशेष अभियान के तहत आगरा कॉलेज और साइबर सेल, पुलिस कमिश्नरेट, आगरा के संयुक्त तत्वावधान में साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट एवं डिजिटल फ्रॉड विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। साइबर विशेषज्ञों ने डिजिटल ठगी के बढ़ते खतरों, डेटा सुरक्षा और जागरूकता के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने कहा कि आज साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का गंभीर प्रश्न बन चुका है।
आगरा कॉलेज के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित इस सेमिनार में साइबर सेल, पुलिस कमिश्नरेट, आगरा के विशेषज्ञ शांतनु अग्रवाल और भगवान सिंह ने विद्यार्थियों, एनसीसी कैडेट्स और शिक्षकों को साइबर सुरक्षा के विविध पहलुओं से अवगत कराया।
शांतनु अग्रवाल ने बताया कि डेटा ही आज का वास्तविक धन है और इसकी सुरक्षा प्रत्येक व्यक्ति की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लालच और लापरवाही का फायदा उठाकर व्यक्तिगत जानकारी तक पहुंच जाते हैं। किसी भी अज्ञात लिंक, संदेश, कॉल या वेबसाइट पर क्लिक न करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि साइबर अपराध की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। उन्होंने यह भी बताया कि अपराध के बाद का पहला एक घंटा स्वर्णिम समय होता है, जिसमें वित्तीय हानि की भरपाई की संभावना सबसे अधिक रहती है।
साइबर विशेषज्ञ भगवान सिंह ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट नामक नई ठगी तेजी से फैल रही है, जबकि भारतीय कानून में इसका कोई प्रावधान नहीं है। किसी भी एजेंसी द्वारा डिजिटल रूप से गिरफ्तारी संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराध दो प्रकार के होते हैं- आर्थिक फ्रॉड और सामाजिक फ्रॉड, जिनसे बचाव के लिए जागरूकता सबसे प्रभावी हथियार है।
उन्होंने छात्रों को टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय करने और विश्वसनीय वेबसाइट्स जैसे haveibeenpwned.com, eScan Cybersecurity, संचार साथी, और virustotal.com के प्रयोग की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में देश में 6000 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड दर्ज हुए थे, जो 2025 में बढ़कर 22000 करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं और 2030 तक यह आंकड़ा 30000 करोड़ रुपये पार कर सकता है।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर पूनम चांद ने कहा कि विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारियां अत्यंत व्यवहारिक हैं और इन्हें हमें अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक जितनी उपयोगी है, उतनी ही संवेदनशील भी है, इसलिए सावधानी और सजगता ही सुरक्षा का मूल मंत्र है।
कार्यक्रम का संचालन आर्मी गर्ल्स विंग की कंपनी कमांडर कैप्टन रीता निगम ने किया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा का ज्ञान समाज में साझा करना हर नागरिक का कर्तव्य है, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों को जागरूक करना सबसे आवश्यक है।
सेमिनार में प्रो. वी.के. सिंह, डॉ. गौरव कौशिक, प्रो. दीपा रावत, प्रो. जयश्री भारद्वाज, प्रो. सुनीता गुप्ता, प्रो. कमलेश शर्मा, प्रो. डी.सी. मिश्रा, प्रो. मोह. मुअज्ज खान, प्रो. मनीष शंकर तिवारी, प्रो. अमरनाथ, प्रो. विश्वंकांत, प्रो. अमित चौधरी, प्रो. अमिता सरकार, प्रो. संध्या यादव, कैप्टन अमित अग्रवाल सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट्स, विधि विभाग तथा अन्य संकायों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश समाज में फैलाने का संकल्प लिया।