जूते, चप्पल, कपड़े हुए सस्ते, 12 और 28 फीसदी के स्लैब खत्म, जीएसटी की मीटिंग में बड़े फैसले
बुधवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई फैसले लिए गए। इनमें जूते-चप्पलों और कपड़ों पर जीएसटी की दर कम करना भी शामिल है।
नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल की बैठक आज बुधवार से शुरू हो गई। दो दिनों तक चलने वाली इस बैठक में बुधवार को पहले दिन कई फैसले लिए गए। जीएसटी काउंसिल ने बुधवार को जूते और कपड़ों पर टैक्स की दरों में कुछ बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। सूत्रों से पता चला है कि इससे ग्राहकों और कारोबारियों दोनों को राहत मिलेगी। वहीं एमएसएमई रजिस्ट्रेशन को लेकर भी राहत दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में ये फैसले लिए गए। बैठक में राज्यों के वित्त मंत्री भी शामिल हुए।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जीएसटी के स्लैब तीन से घटाकर दो कर दिए गए हैं। पंजाब के वित्त मंत्री ने बताया कि बैठक में फैसला लिया गया है कि जीएसटी के सिर्फ दो ही स्लैब होंगे- 5 फीसदी और 18 फीसदी, जबकि तीसरा स्लैब स्पेशल होगा।
इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार नए बदलाव के तहत अब 2500 रुपये तक के जूते-चप्पल और कपड़े 5% टैक्स के दायरे में आएंगे। पहले सिर्फ 1000 रुपये तक के सामान पर 5% जीएसटी लगता था, जबकि उससे ऊपर के सामान पर 12% टैक्स लगता था। अगर अब आप 2500 रुपये तक के जूते या चप्पल या कपड़े खरीदते हैं तो आपको पहले के मुकाबले फायदा होगा यानी ये चीजें आपको सस्ती मिलेंगी।
बुधवार को जीएसटी काउंसिल ने एक और बड़ा फैसला लिया। काउंसिल ने 12% और 28% के स्लैब को खत्म करने का फैसला किया है। अब ज्यादातर चीजों को 5% और 18% के स्लैब में रखा जाएगा। इस बदलाव का मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना है। इससे नियमों का पालन करना आसान होगा, मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए चीजें सस्ती होंगी।
एमएसएमई रजिस्ट्रेशन में भी सरकार ने नए कारोबारियों को राहत दी है। एमएसएमई रजिस्ट्रेशन अब तीन दिनों में हो जाएगा। सूत्रों के अनुसार, नए उपायों से एमएसएमई के लिए रजिस्ट्रेशन तीन दिनों में संभव हो जाएगा। अभी तक इसमें कई हफ्ते का समय लगता था। इस फैसले से छोटे उद्योगों का रजिस्ट्रेशन आसानी से हो जाएगा।
जीएसटी काउंसिल ने 'प्लेस ऑफ सप्लाई' की परिभाषा में भी बदलाव को मंजूरी दी है। इससे इंटरमीडियरीज को इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने में मदद मिलेगी। इस फैसले से भारत, ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर्स और आईटीईएस सर्विसेज के लिए एक आकर्षक केंद्र बन सकता है।
रेट को तर्कसंगत बनाने पर चर्चा गुरुवार को भी जारी रहेगी। विपक्षी राज्य, राज्यों को होने वाले राजस्व नुकसान का विस्तृत अनुमान चाहते हैं। केंद्र सरकार ने इस पर सहमति जताई है। विपक्षी राज्य राजस्व नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे राज्यों की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा। काउंसिल ने सीबीआईसी से पोस्ट सेल्स डिस्काउंट पर जीएसटी को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। इसके लिए विस्तृत सर्कुलर जारी किया जाएगा।