छह साल की देरी खत्म, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के आगे झुकी सरकार, बना राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड, अधिवक्ता एवं रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट के.सी. जैन की याचिका के बाद केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना, अब बोर्ड के प्रभावी संचालन पर रहेगी सुप्रीम नजर

आगरा/नई दिल्ली। देश में हर वर्ष होने वाले लाखों सड़क हादसों और उनमें होने वाली करीब पौने दो लाख मौतों के बीच आखिरकार छह वर्षों का इंतजार समाप्त हो गया। मोटर वाहन अधिनियम, 2019 में प्रावधान होने के बावजूद लंबे समय तक केवल कागजों तक सीमित रहे राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन केंद्र सरकार ने कर दिया है। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और अधिवक्ता एवं रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट के.सी. जैन की लगातार कानूनी लड़ाई का परिणाम है। केंद्र सरकार ने 29 जून 2026 को राजपत्र अधिसूचना संख्या 3505(अ) जारी कर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का विधिवत गठन कर दिया है।

Jul 3, 2026 - 10:47
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छह साल की देरी खत्म, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के आगे झुकी सरकार, बना राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड, अधिवक्ता एवं रोड सेफ्टी एक्टिविस्ट के.सी. जैन की याचिका के बाद केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना, अब बोर्ड के प्रभावी संचालन पर रहेगी सुप्रीम नजर

के.सी. जैन की याचिका के बाद तेज हुई प्रक्रिया

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से विचाराधीन था। एस. राजसीकरन बनाम भारत संघ (रिट याचिका संख्या-295/2012) में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों की सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के.सी. जैन ने आई.ए. संख्या-43519/2024 दाखिल कर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215-बी के तहत राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन कराने की मांग की थी। इस आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट में तीन बार सुनवाई हुई।

सरकार को कई बार मिली मोहलत, फिर भी नहीं बना बोर्ड

17 अप्रैल 2025 को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने बोर्ड गठन के लिए नौ माह का समय मांगा था। इसके बाद 14 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को केवल छह माह का समय देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि आगे किसी प्रकार की मोहलत नहीं दी जाएगी।

इसके बावजूद निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी बोर्ड का गठन नहीं हुआ। 13 मई 2026 को जब मामला दोबारा सुनवाई में आया तो जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र सरकार पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले छह वर्षों से यह मामला केवल चर्चाओं तक सीमित है, जबकि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड नियम, 2025 पहले ही अक्टूबर 2025 में अधिसूचित किए जा चुके हैं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए तीन माह के भीतर, यानी लगभग 12 अगस्त 2026 तक हर हाल में बोर्ड गठित करने का आदेश दिया था।

समय सीमा से पहले जारी हुई अधिसूचना

सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से लगभग डेढ़ माह पहले ही केंद्र सरकार ने 29 जून 2026 को राजपत्र अधिसूचना संख्या 3505(अ) जारी कर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड का गठन कर दिया।

डॉ. नितिन आर. गोकर्ण बने बोर्ड के अध्यक्ष

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व अपर मुख्य सचिव एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. नितिन आर. गोकर्ण को नियुक्त किया गया है।

बोर्ड में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और दिल्ली के परिवहन आयुक्त सदस्य बनाए गए हैं। महाराष्ट्र, ओडिशा और त्रिपुरा के अपर पुलिस महानिदेशक भी सदस्य होंगे।

पदेन सदस्यों में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अपर महानिदेशक (पूर्व) तथा अपर महानिदेशक (उत्तर एवं गुणवत्ता नियंत्रण), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के सदस्य (प्रशासन) और सदस्य (सड़क सुरक्षा) तथा राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के निदेशक (तकनीकी-प्रथम) शामिल किए गए हैं।

विशेषज्ञ सदस्यों में कई बड़े नाम शामिल

विशेषज्ञ सदस्यों में सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी सत्येंद्र गर्ग (प्रवर्तन एवं यातायात प्रबंधन विशेषज्ञ), आरुषि बलूजा साही (विभागाध्यक्ष, चालक प्रशिक्षण, आईआरटीई), हर्ष ए. पोद्दार (आईपीएस, पुलिस अधीक्षक, नागपुर ग्रामीण), गौरव उपाध्याय (आईपीएस, सचिव परिवहन विभाग, असम सरकार), पीयूष तिवारी (संस्थापक एवं सीईओ, सेव लाइफ फाउंडेशन), के.सी. शर्मा (सलाहकार, मोटर वाहन कानून, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) तथा प्रो. गौतम मेलूर सुकुमार (एनआईएमएचएएनएस, बेंगलुरु) को शामिल किया गया है।

बोर्ड के पदेन सदस्य सचिव सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अपर सचिव/संयुक्त सचिव (परिवहन) होंगे।

बोर्ड बन गया, लेकिन लड़ाई अभी बाकी

अधिवक्ता के.सी. जैन ने अपनी याचिका में केवल बोर्ड गठन की मांग नहीं की थी, बल्कि यह भी आग्रह किया था कि बोर्ड पूरी तरह सक्रिय और पारदर्शी तरीके से कार्य करे। उन्होंने बोर्ड की स्वतंत्र वेबसाइट, संपर्क विवरण, सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा 4(1)(ख) के तहत सभी निर्णयों और गतिविधियों की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें भी उठाई हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट अभी विचार करेगा।

अब असली परीक्षा प्रभावी कामकाज की

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन के बाद अब इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी सड़क सुरक्षा नीतियां तैयार करना, वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, स्पीड गवर्नर जैसे सुरक्षा उपकरणों की निगरानी करना, राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना तथा सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी रणनीति लागू करना होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपने आदेशों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 3 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें अदालत बोर्ड की कार्यप्रणाली और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की समीक्षा करेगी।

35 याचिकाओं के जरिए सड़क सुरक्षा की लड़ाई

अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के.सी. जैन अब तक सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर सुप्रीम कोर्ट में 35 याचिकाएं दाखिल कर चुके हैं। इनमें सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के कैशलेस उपचार, यातायात नियमों के उल्लंघन पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी, हिट एंड रन मामलों में मुआवजा, सड़क हादसों में घायल लोगों को अंतरिम राहत तथा उत्तर प्रदेश सरकार के चालान माफी अध्यादेश को आंशिक रूप से वापस लेने जैसे मामलों में सकारात्मक आदेश प्राप्त हो चुके हैं।

के.सी. जैन बोले- सिर्फ गठन नहीं, प्रभावी कार्रवाई जरूरी

अधिवक्ता के.सी. जैन ने कहा कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा बोर्ड के गठन के लिए उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 215-बी के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। तीन बार सुनवाई के बाद बोर्ड गठन की अधिसूचना जारी होना संतोष का विषय है, लेकिन केवल बोर्ड बना देना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ष पौने दो लाख से अधिक लोगों की जान सड़क हादसों में चली जाती है। ऐसे में बोर्ड को तत्काल प्रभाव से सक्रिय होकर काम करना चाहिए, क्योंकि यह प्रत्येक नागरिक के संविधान प्रदत्त जीवन के अधिकार से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र और राज्य सरकारें बोर्ड के निर्देशों का कितना प्रभावी पालन करती हैं। यदि बोर्ड के निर्देशों के अनुपालन में किसी स्तर पर कमी रहती है तो वह विषय पुनः सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया जाएगा, ताकि अदालत आवश्यक निर्देश जारी कर सके।

SP_Singh AURGURU Editor