दिशा सालियान मौत मामले में अब खुलेगा छह साल पुराना राज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का दिया आदेश, जांच के घेरे में आदित्य ठाकरे समेत कई नाम

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत का छह साल पुराना मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथों में पहुंच गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को दिशा के पिता सतीश सालियान की याचिका स्वीकार करते हुए सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने का आदेश दिया। अदालत ने मुंबई पुलिस को मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और भौतिक साक्ष्य सीबाआई को सौंपने का निर्देश भी दिया है। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का निष्कर्ष नहीं है। जांच में पर्याप्त आधार मिलने पर ही किसी को आरोपी बनाया जा सकेगा।

Sep 2, 2026 - 12:58
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दिशा सालियान मौत मामले में अब खुलेगा छह साल पुराना राज, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का दिया आदेश, जांच के घेरे में आदित्य ठाकरे समेत कई नाम

दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद मौत हुई थी। उस समय उनकी उम्र 28 वर्ष थी। उनकी मौत के ठीक छह दिन बाद 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत भी मुंबई के बांद्रा स्थित अपने आवास में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच बेहद कम अंतर होने के कारण दिशा की मौत का मामला सुशांत प्रकरण के दौरान भी लगातार चर्चा में रहा।

पिता ने लगाए थे हत्या के गंभीर आरोप

दिशा के पिता सतीश सालियान ने हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में दावा किया था कि उनकी बेटी की मौत सामान्य आत्महत्या नहीं थी। उन्होंने गैंगरेप और हत्या की आशंका जताते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की थी। साथ ही उन्होंने कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच को प्रभावित किए जाने का आरोप लगाया था। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की थी। ये आरोप फिलहाल जांच का विषय हैं और अदालत ने इनमें से किसी को दोषी नहीं माना है।

हाईकोर्ट ने एफआईआर न होने पर उठाया सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए कि परिवार की ओर से मौत की परिस्थितियों पर संदेह जताए जाने के बावजूद एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई। अदालत ने यह भी सवाल किया कि यदि पुलिस ने जांच की थी तो संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड परिवार को उपलब्ध कराने में क्या बाधा थी। कोर्ट ने लंबे समय तक केवल आकस्मिक मृत्यु की जांच के आधार पर मामले को आगे बढ़ाए जाने की कानूनी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

मुंबई पुलिस ने शुरुआत में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (एडीआर) के आधार पर जांच की थी। पुलिस का निष्कर्ष रहा कि दिशा ने आत्महत्या की थी और जांच में किसी तरह की आपराधिक साजिश या अन्य गड़बड़ी सामने नहीं आई। बाद में 2023 में मामले की दोबारा समीक्षा के लिए एसआईटी गठित की गई। पुलिस का कहना रहा कि एसआईटी के निष्कर्ष भी पहले की जांच से मेल खाते थे।

पोस्टमॉर्टम और जांच प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

दिशा के परिवार की ओर से पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान परिवार की ओर से यह दावा किया गया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की प्रति काफी देर से उपलब्ध कराई गई। वहीं जांच के दस्तावेजों और आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट को लेकर भी परिवार ने आपत्ति जताई थी। हाईकोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए मामले की जांच की वैधानिक प्रक्रिया और उसके निष्कर्षों की विश्वसनीयता पर विस्तार से विचार किया।

अब सीबीआई करेगी पूरी जांच

हाईकोर्ट ने सीबीआई के मुंबई क्षेत्र के संयुक्त निदेशक को निर्देश दिया है कि वह वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करें। अधिकारी पहले सतीश सालियान का बयान दर्ज करेगा और इसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जाएगी। अदालत ने कहा है कि जांच के दौरान उपलब्ध सामग्री के आधार पर ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाएगा। यदि जांच में अपराध के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो सीबीआई संबंधित अदालत के समक्ष रिपोर्ट दाखिल करेगी और यदि अपराध साबित करने वाला आधार नहीं मिलता तो नियमानुसार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की जा सकती है।

अदालत ने सतीश सालियान को यह स्वतंत्रता भी दी है कि यदि सीबीआई की जांच के बाद दाखिल रिपोर्ट से वह संतुष्ट नहीं होते हैं तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत चुनौती दे सकते हैं। इस तरह हाईकोर्ट ने मामले में अंतिम दोष या निर्दोषता तय करने के बजाय स्वतंत्र जांच का रास्ता खोला है।

छह साल से जवाब का इंतजार

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सतीश सालियान ने कहा कि वह करीब छह साल से इस जांच का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बेटी को खोने का दुख अपनी जगह है और इस आदेश से केवल राहत महसूस हुई है। उनका कहना है कि अब उन्हें उम्मीद है कि स्वतंत्र जांच से उनकी बेटी की मौत की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी।

सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने पहले ही कहा था कि उनके मुवक्किल की शिकायत में आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ एफआई की मांग की गई है। अब हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश के बाद यह शिकायत भी जांच का हिस्सा होगी। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल आरोप या किसी का नाम शिकायत में होने से उसे आरोपी नहीं माना जा सकता। सीबीआई को जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करनी होगी।

राजनीतिक विवाद भी रहा केंद्र में

दिशा सालियान की मौत का मामला पिछले कई वर्षों से महाराष्ट्र की राजनीति में भी विवाद का विषय रहा है। भाजपा नेता नितेश राणे समेत महायुति के नेताओं ने मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी और आदित्य ठाकरे को लेकर सवाल उठाए थे। दूसरी ओर आदित्य ठाकरे ने इन आरोपों को खारिज किया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग मामले की जांच सीबीआई के हाथ में होगी और जांच में सामने आने वाले साक्ष्य ही आगे की कानूनी कार्रवाई का आधार बनेंगे।

दिशा सालियान की मौत और उसके छह दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बीच समय का बेहद कम अंतर इस पूरे प्रकरण को वर्षों से रहस्यमय और चर्चित बनाए हुए है। अब सीबीआई को दोनों घटनाओं के बीच किसी भी संभावित संबंध समेत दिशा की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करनी होगी। हाईकोर्ट के आदेश के साथ छह साल से चले आ रहे इस मामले में एक नई और स्वतंत्र जांच की शुरुआत हो गई है।

SP_Singh AURGURU Editor