स्नान पूर्णिमा पर आगरा में गजानन स्वरूप में होंगे श्रीजगन्नाथ के दिव्य दर्शन, महाभिषेक के बाद 15 दिन बंद रहेंगे मंदिर के पट

आगरा। श्रीजगन्नाथ मंदिर (इस्कॉन) द्वारा 29 जून को महाराजा अग्रसेन भवन, लोहामंडी में श्रीजगन्नाथ महाभिषेक स्नान यात्रा महोत्सव (स्नान पूर्णिमा) का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान श्रीजगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम का पंच नदियों के जल, पंचामृत, पंचगव्य तथा फलों के रस से वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच महाअभिषेक किया जाएगा। महाभिषेक के बाद भगवान गजानन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे। इसके उपरांत परंपरा के अनुसार मंदिर के पट 15 दिनों के लिए बंद रहेंगे।

Jun 24, 2026 - 18:41
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स्नान पूर्णिमा पर आगरा में गजानन स्वरूप में होंगे श्रीजगन्नाथ के दिव्य दर्शन, महाभिषेक के बाद 15 दिन बंद रहेंगे मंदिर के पट
अग्रसेन भवन लोहामंडी में श्रीजगन्नाथ महाभिषेक स्नान यात्रा महोत्सव के आमंत्रण पत्र का विमोचन करते आयोजक।

मंदिर परिसर में आयोजित आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम में इस्कॉन आगरा के अध्यक्ष अरविन्द प्रभु ने बताया कि सनातन वैष्णव परंपरा में स्नान पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्रीजगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा महारानी का सैकड़ों कलशों से महाअभिषेक किया जाता है, जिसमें श्रद्धालुओं को भी सहभागी बनने का अवसर मिलेगा।

उन्होंने बताया कि 29 जून को सुबह मंगला आरती और राजभोग के बाद भगवान श्रीजगन्नाथ की शोभायात्रा मृदंग, मंजीरों और हरिनाम संकीर्तन के साथ महाराजा अग्रसेन भवन पहुंचेगी। यहां षोडशोपचार पूजन के बाद पंच नदियों के जल, पंचामृत, पंचगव्य, फलों के रस एवं 251 कलशों से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद भगवान का आकर्षक पुष्पों एवं विशेष परिधानों से गजानन स्वरूप में श्रृंगार होगा।

स्नान यात्रा एवं रथयात्रा के संयोजक नितेश अग्रवाल और कान्ता प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि महाभिषेक के बाद भगवान के विग्रहों को विश्राम दिया जाता है। इसी परंपरा के तहत अगले 15 दिनों तक मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। इस अवधि को अनवसर (अनासार) काल कहा जाता है। इस दौरान भगवान की विशेष सेवा, उपचार एवं श्रृंगार किया जाएगा। 15 दिन बाद भगवान नवयौवन स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे, जिसे नवयौवन दर्शन कहा जाता है। इसके बाद भव्य रथयात्रा महोत्सव आयोजित होगा।

अदिति गौरांगी ने बताया कि यह परंपरा भगवान और भक्त के बीच प्रेम एवं विरह की भावना का प्रतीक है। अनवसर काल के बाद भगवान के दर्शन का महत्व और श्रद्धा कई गुना बढ़ जाती है।

इस अवसर पर विमल फतेहपुरिया, अमित बंसल, सुधीर अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, अनूप अग्रवाल, विकास बंसल, नवीन सिंघल, सुशील अग्रवाल, अनुज अग्रवाल, अतुल कत्याल, अंकित अग्रवाल, हर्ष खटाना, आशीष गोयल, विपिन अग्रवाल, शैलेश बंसल, राजेश उपाध्याय, राजीव मल्होत्रा, संजय कुकरैजा और रमेश यादव सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor