तो क्या पीएचडी के तनाव ने छीन ली नम्रता की जिंदगी! जांच में डिप्रेशन की बात आई सामने, पीएचडी का कार्य खराब होने के बाद रहती थीं मानसिक तनाव में, पति से कई बार कहा था- मर जाने का मन करता है

आगरा। डीईआई की शोध छात्रा नम्रता गुप्ता की आत्महत्या के मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि वह लंबे समय से मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रही थीं। पुलिस को जानकारी मिली है कि पीएचडी का कार्य अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने के बाद वह गहरे तनाव में चली गई थीं और अक्सर निराशा भरी बातें करती थीं।

Jun 15, 2026 - 12:12
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तो क्या पीएचडी के तनाव ने छीन ली नम्रता की जिंदगी! जांच में डिप्रेशन की बात आई सामने, पीएचडी का कार्य खराब होने के बाद रहती थीं मानसिक तनाव में, पति से कई बार कहा था- मर जाने का मन करता है
Symbolic Imahe- ShutterStock

न्यू आगरा थाना पुलिस के अनुसार नम्रता गुप्ता की आत्महत्या के पीछे पारिवारिक विवाद जैसी कोई बात अभी तक सामने नहीं आई है। पुलिस ने मायका और ससुराल पक्ष के लोगों से पूछताछ की। दोनों पक्षों ने किसी तरह के विवाद या उत्पीड़न से इनकार किया है। ऐसे में जांच का फोकस अब नम्रता की मानसिक स्थिति और शैक्षणिक दबाव पर केंद्रित है।

पति से कहती थीं- मर जाने का मन करता है

न्यू आगरा के थाना प्रभारी निशामक त्यागी ने बताया कि जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि नम्रता कई बार अपने पति विकास कुमार से कहती थीं कि उनका जीने का मन नहीं करता। वह पीएचडी से जुड़ा कार्य खराब होने को लेकर बेहद परेशान रहती थीं। हालांकि पुलिस को अब तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, इसलिए आत्महत्या के सटीक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

पहले ही मंगा ली थीं सल्फास की गोलियां

पुलिस जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि नम्रता ने कुछ समय पहले ऑनलाइन सल्फास की गोलियां मंगाई थीं। परिवार के लोगों ने जब गोलियां देखीं तो पूछने पर उन्होंने बताया था कि गेहूं में रखने के लिए मंगाई हैं। पति ने गोलियों के चार पत्ते फेंक दिए थे, लेकिन नम्रता ने दो पत्ते पहले ही छिपाकर रख लिए थे। आशंका है कि उन्हीं गोलियों का इस्तेमाल आत्मघाती कदम उठाने में किया गया।

पुलिस कर रही हर पहलू की जांच

थाना प्रभारी निशामक त्यागी ने बताया कि पोस्टमार्टम कराया जा चुका है और विसरा सुरक्षित रखा गया है। फिलहाल किसी पक्ष ने कोई आरोप नहीं लगाया है। पुलिस आत्महत्या के पीछे की परिस्थितियों और मानसिक तनाव से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

नम्रता की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि उच्च शिक्षा और शोध के बढ़ते दबाव के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील और प्रभावी व्यवस्था की कितनी आवश्यकता है।

SP_Singh AURGURU Editor