कमर्शियल का झांसा, निकला रिहायशी भूखंड, एडीए जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा
आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में एक प्लॉट बिक्री विवाद में नीतेश मित्तल पर कमर्शियल बताकर आवासीय भूखंड बेचने, फर्जी नक्शा दिखाने और रकम वापस मांगने पर धमकी देने के आरोप लगे हैं। एडीए जांच में भूखंड आवासीय श्रेणी का पाया गया। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रकम मांगने पर धमकी देने का आरोप, कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ मुकदमा
आगरा। आगरा में प्लॉट बिक्री को लेकर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। सिकंदरा थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति पर कमर्शियल भूखंड बताकर आवासीय प्लॉट बेचने, फर्जी नक्शा दिखाने और रकम वापस मांगने पर धमकी देने के आरोप लगे हैं। मामले में अदालत के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यशोधन सिंह ने आरोप लगाया है कि आरोपी नीतेश मित्तल ने नारायण विहार स्थित एक भूखंड को कमर्शियल प्लॉट बताकर उन्हें बेचा था। सौदे के दौरान कथित रूप से ऐसा नक्शा और दस्तावेज दिखाए गए, जिनसे भूखंड का व्यावसायिक उपयोग होना प्रदर्शित किया गया।
बाद में जब मामले की जांच कराई गई तो आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के अभिलेखों में उक्त भूखंड आवासीय श्रेणी का पाया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वास्तविक स्थिति सामने आने पर उन्होंने आरोपी से अपनी रकम वापस मांगी, लेकिन रकम लौटाने के बजाय उन्हें धमकियां दी गईं।
पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली, जिसके बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। अदालत के निर्देश पर सिकंदरा थाना पुलिस ने आरोपी नीतेश मित्तल के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेजों, बैनामे, एडीए रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मामले ने संपत्ति खरीद-बिक्री में पारदर्शिता और दस्तावेजों की सत्यता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी भूखंड की खरीद से पहले संबंधित विकास प्राधिकरण और राजस्व अभिलेखों से उसकी स्थिति की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए।