सीईसी के खिलाफ आगरा में सपा का हल्लाबोल, सांसद रामजीलाल सुमन हाउस अरेस्ट, कलेक्ट्रेट पर पुलिस से भिड़े कार्यकर्ता

सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आगरा में सपा ने कलेक्ट्रेट घेराव का प्रयास किया। सुभाष पार्क से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, जिसके बाद नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। सपा सांसद रामजीलाल सुमन को हाउस अरेस्ट किया गया। सपा ने ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ के नारे लगाए। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट और सीईसी ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास पर सुरक्षा बढ़ाई गई। इससे पहले 28 सितंबर को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सीईसी आवास तक पहुंचने की घटना के बाद प्रशासन इस बार अतिरिक्त सतर्क रहा।

Oct 8, 2026 - 13:58
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सीईसी के खिलाफ आगरा में सपा का हल्लाबोल, सांसद रामजीलाल सुमन हाउस अरेस्ट, कलेक्ट्रेट पर पुलिस से भिड़े कार्यकर्ता
पुलिस हिरासत में सांसद रामजीलाल सुमन व अन्य सपाई। काले कपड़ों में काला दिवस मनाती कांग्रेस।

 

आगरा। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ के तहत गुरुवार को आगरा में सियासी पारा चढ़ गया। कलेक्ट्रेट घेराव के ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन ने सुबह से ही शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। इसके बावजूद सपा कार्यकर्ता पुलिस को चकमा देते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए और जमकर नारेबाजी की। सुभाष पार्क से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया। 

प्रदर्शनकारियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए डीसीपी सिटी सैयद अली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और कलेक्ट्रेट क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात कर दी। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी को लेकर सीईसी के इस्तीफे की मांग की जा रही है।

सांसद रामजीलाल सुमन हाउस अरेस्ट

सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रामजीलाल सुमन को पुलिस ने उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर नजरबंद कर रहा है। सुमन ने कहा कि “यह चुनाव आयोग नहीं है, मोदी आयोग है। हमारे घर पर भी आकर पुलिसवाले बैठ गए हैं। यह मामला बहुत गंभीर है। लोकतंत्र के साथ मजाक है।” सपा नेताओं का आरोप है कि कई कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही रोक दिया गया, जबकि रास्ते में मिलने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक, कुछ नेताओं के घरों के बाहर रात से ही पुलिस तैनात कर दी गई थी। इसके बावजूद कई कार्यकर्ता पुलिस की निगरानी को चकमा देकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज बताते हुए प्रदर्शन किया।

आगरा में पहले से ज्यादा सख्त प्रशासन, कलेक्ट्रेट के आसपास बैरिकेडिंग

सपा के कलेक्ट्रेट घेराव के ऐलान के बाद प्रशासन ने इस बार पहले से ही सुरक्षा का मजबूत घेरा तैयार कर लिया था। कलेक्ट्रेट के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया। बैरिकेडिंग लगाकर आने-जाने वालों पर नजर रखी गई। प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता 28 सितंबर की घटना की पुनरावृत्ति रोकना थी। उस दिन कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस को चकमा देकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास तक पहुंच गए थे। प्रदर्शनकारियों ने घर की दीवार पर कालिख पोत दी थी और आपत्तिजनक शब्द लिखे थे। घटना के बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर जेल भेजा था।

सीईसी के घर पर बढ़ाई गई सुरक्षा

सपा के प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट घेराव के ऐलान को देखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई। घर के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस इस बात को लेकर विशेष रूप से सतर्क रही कि प्रदर्शनकारी किसी भी तरह आवास तक न पहुंच सकें। ज्ञानेश कुमार को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त है। प्रशासन ने कलेक्ट्रेट प्रदर्शन के साथ-साथ उनके पैतृक आवास की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी।

कांग्रेस के प्रदर्शन के बाद हुआ था गंगा जल से शुद्धिकरण

28 सितंबर की घटना के बाद वैश्य समाज के लोगों ने सीईसी के पैतृक आवास पर कलश यात्रा निकाली थी। इसके बाद घर का गंगा जल से शुद्धिकरण किया गया था। उस समय सीईसी की मां ने कहा था कि कुछ लोग घर को गंदा कर गए थे और अब लोग पूजा कर घर को शुद्ध कर रहे हैं। यही वजह रही कि गुरुवार के सपा प्रदर्शन को लेकर पुलिस-प्रशासन पहले से ही पूरी तरह सतर्क नजर आया। प्रशासन ने किसी भी प्रदर्शनकारी को सीईसी के पैतृक आवास तक पहुंचने से रोकने के लिए सुरक्षा का घेरा मजबूत कर दिया।

कांग्रेस ने भी मनाया ‘काला दिवस’

सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने भी ‘काला दिवस’ मनाया। एआईसीसी के निर्देश पर आयोजित विरोध कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का मुद्दा उठाया। अमित सिंह के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए और संवैधानिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।

आगरा में सपा के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हुई नोकझोंक ने साफ कर दिया कि सीईसी के इस्तीफे का मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति में टकराव का नया केंद्र बनता जा रहा है। एक ओर विपक्ष इसे लोकतंत्र और मताधिकार की लड़ाई बता रहा है, वहीं प्रशासन प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।