अखिलेश यादव की बेटी पर वायरल पोस्ट को लेकर सपा का विरोध, साइबर जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग
सपा प्रदेश सचिव राहुल चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर वायरल कथित भ्रामक पोस्टों के खिलाफ शिकायत की। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पुत्री के संबंध में प्रसारित सामग्री को असत्य और मानहानिकारक बताया। साइबर सेल से मामले की जांच कर मूल स्रोतों की पहचान करने की मांग की गई। आपत्तिजनक सामग्री हटाने और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई। पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगरा। आगरा में समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही कथित भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सपा के प्रदेश सचिव राहुल चतुर्वेदी ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के संबंध में वायरल की जा रही पोस्टों को गंभीर विषय बताते हुए साइबर सेल से तत्काल जांच कराने की मांग की है।
सपा नेता राहुल चतुर्वेदी ने इस संबंध में दिए गए शिकायती पत्र में कहा है कि विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही है, जो तथ्यों पर आधारित नहीं है और जिसका उद्देश्य एक बेटी की गरिमा, निजता और सम्मान को ठेस पहुंचाना प्रतीत होता है। उनका कहना है कि इस तरह की पोस्ट न केवल एक परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में भ्रम और नकारात्मक माहौल भी पैदा करती हैं।
सपा नेता ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया के माध्यम से फैलाई जा रही कथित झूठी और भ्रामक सूचनाएं लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी चुनौती बन रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सौहार्द की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है तथा किसी भी व्यक्ति, विशेषकर महिलाओं और बेटियों के खिलाफ मानहानिकारक सामग्री का प्रसार स्वीकार नहीं किया जा सकता।
शिकायत में मांग की गई है कि वायरल पोस्टों के मूल स्रोतों की पहचान कर यह पता लगाया जाए कि इन्हें किसने तैयार किया और किन माध्यमों से प्रसारित किया गया। साथ ही संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए।
राहुल चतुर्वेदी ने यह भी अनुरोध किया है कि संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को निर्देशित कर आपत्तिजनक और मानहानिकारक सामग्री को तत्काल हटवाया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। उनका कहना है कि सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच के बीच फर्जी और भ्रामक सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जनहित, महिला सम्मान, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा के लिए प्रशासन को इस मामले में त्वरित और प्रभावी कदम उठाने चाहिए। फिलहाल इस मामले में पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।