मोबाइल में बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट मिला तो होगी सख्त कार्रवाई, आगरा में दो मुकदमे दर्ज
अगर आपके मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या क्लाउड स्टोरेज में बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट (CSAM) मौजूद है या आप उसे सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप के जरिए साझा करते हैं, तो यह गंभीर अपराध है। आगरा साइबर क्राइम थाने में ऐसे दो मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय और भारतीय साइबर एजेंसियां इस तरह की ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं।
सिर्फ शेयर करना ही नहीं, डाउनलोड कर रखना भी अपराध, साइबर एजेंसियों की हर गतिविधि पर पैनी नजर
आगरा। बच्चों से जुड़े अश्लील फोटो या वीडियो को मोबाइल या लैपटॉप में रखना, डाउनलोड करना या सोशल मीडिया पर साझा करना अब भारी पड़ सकता है। यह केवल नैतिक रूप से गलत नहीं, बल्कि कानून के तहत गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय साइबर एजेंसियों से लेकर भारतीय जांच एजेंसियां तक लगातार निगरानी कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
विदेश से मिलती है सूचना, भारत में होती है कार्रवाई
बच्चों के यौन शोषण से जुड़े ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी के लिए अमेरिका की National Center for Missing and Exploited Children (NCMEC) की CyberTipline दुनिया भर में काम करती है। सोशल मीडिया कंपनियां, इंटरनेट सेवा प्रदाता और आम लोग संदिग्ध सामग्री की जानकारी यहां भेजते हैं। रिपोर्ट की पुष्टि होने के बाद यह सूचना भारत के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) को भेजी जाती है। इसके बाद एनसीआरबी संबंधित राज्य की साइबर पुलिस को जानकारी देता है, जिसके आधार पर जांच शुरू होती है।
आगरा में दो लोगों पर दर्ज हुए मुकदमे
हाल ही में आगरा साइबर क्राइम पुलिस थाने में साइबर टिपलाइन से मिली दो रिपोर्टों के आधार पर दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए हैं। पहले मामले में एक इंस्टाग्राम अकाउंट के जरिए बच्चों से जुड़ा अश्लील कंटेंट प्रसारित करने के आरोप में रिचर्ड केल्विन डॉयल, निवासी लालकुर्ती, आगरा के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं दूसरे मामले में अरुण कुमार, निवासी रामबाग बस्ती, कुबेरपुर, आगरा के खिलाफ भी इंस्टाग्राम के माध्यम से बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री प्रसारित करने के आरोप में आईटी एक्ट की धारा 67B के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस दोनों मामलों में डिजिटल साक्ष्य जुटाकर आगे की जांच कर रही है।
सिर्फ शेयर नहीं, मोबाइल में रखना भी अपराध
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से जुड़े अश्लील फोटो या वीडियो को केवल सोशल मीडिया पर अपलोड करना ही अपराध नहीं है। यदि कोई व्यक्ति ऐसी सामग्री डाउनलोड करता है, मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट में सुरक्षित रखता है, क्लाउड स्टोरेज में सेव करता है या किसी अन्य व्यक्ति को भेजता है, तब भी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल फोरेंसिक जांच के दौरान डिलीट की गई फाइलें भी कई बार रिकवर कर ली जाती हैं। इसलिए ऐसी किसी भी अवैध सामग्री को अपने किसी भी डिजिटल डिवाइस में रखना कानूनन जोखिम भरा है।
पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या मैसेजिंग ऐप पर बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री दिखाई दे तो उसे न डाउनलोड करें, न किसी को भेजें और तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म या साइबर पुलिस को इसकी सूचना दें।