ब्रिक्स 2026 में नेशनल चैम्बर की दमदार भागीदारी: एमएसएमई के वित्त, तकनीक और सतत विकास पर वैश्विक मंथन
ब्रिक्स 2026 के अंतर्गत आगरा में आयोजित एमएसएमई कार्यशाला में नेशनल चैम्बर के प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया। कार्यशाला में वित्तीय पहुंच, तकनीकी उन्नयन और सतत विकास आधारित उद्योगों पर व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप सशक्त बनाने के लिए डिजिटलीकरण, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग, आधुनिक तकनीक और सरल वित्तीय संसाधनों तक पहुंच को आवश्यक बताया।
आगरा। ब्रिक्स 2026 के अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी और सशक्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार को ताज होटल, आगरा में भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने सहभागिता की। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, उद्यमियों तथा विभिन्न संस्थानों के अधिकारियों ने एमएसएमई क्षेत्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों, संभावनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर व्यापक मंथन किया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूत करना तथा एमएसएमई क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना रहा। कार्यशाला के दौरान विशेष रूप से एमएसएमई के लिए वित्तीय पहुंच, एमएसएमई के लिए तकनीकी पहुंच तथा सतत विकास आधारित एमएसएमई की वृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार रखे और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई क्षेत्र रीढ़ की हड्डी की भूमिका निभाता है। इस क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों की वित्तीय संसाधनों तक सरल और सहज पहुंच सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। कार्यशाला में विभिन्न बैंकिंग योजनाओं, ऋण सुविधाओं, क्रेडिट गारंटी योजनाओं तथा वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों की विस्तृत जानकारी दी गई, ताकि छोटे उद्यमी अपने उद्योगों का विस्तार कर सकें और रोजगार सृजन को गति मिल सके।
तकनीकी उन्नयन पर रहा विशेष जोर
एमएसएमई के लिए तकनीकी पहुंच विषय पर विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी औद्योगिक वातावरण में तकनीकी उन्नयन ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। उद्यमियों को डिजिटलीकरण, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड टेक्नोलॉजी तथा आधुनिक उत्पादन प्रणालियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं तकनीकी सहायता कार्यक्रमों की जानकारी भी साझा की गई, जिनकी सहायता से एमएसएमई इकाइयां अपनी उत्पादकता, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ा सकती हैं।
ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग और सतत विकास पर हुआ गहन विमर्श
कार्यक्रम में सतत विकास (सस्टेनेबिलिटी) को भविष्य की औद्योगिक प्रगति का आधार बताते हुए विशेषज्ञों ने ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग, कार्बन उत्सर्जन में कमी, ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग तथा पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन प्रक्रियाओं को अपनाने पर विशेष बल दिया। वक्ताओं ने कहा कि जो एमएसएमई इकाइयां सतत विकास आधारित मॉडल अपनाएंगी, वे न केवल वैश्विक बाजारों में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाएंगी बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक लाभ भी अर्जित कर सकेंगी।
ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर दिया गया बल
कार्यक्रम में मौजूद उद्योग प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार, तकनीकी आदान-प्रदान और औद्योगिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं एमएसएमई क्षेत्र को नई दिशा देंगी तथा भारत को वैश्विक आर्थिक विकास में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।
चैम्बर का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल रहा शामिल
ब्रिक्स 2026 कार्यशाला में चैम्बर की ओर से चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, पूर्व अध्यक्ष एवं एमएसएमई प्रकोष्ठ के चेयरमैन संजय गोयल, उपाध्यक्ष अम्बा प्रसाद गर्ग, औद्योगिक विकास प्रकोष्ठ के चेयरमैन अनूप गोयल तथा स्थानीय प्रशासन समन्वय प्रकोष्ठ के चेयरमैन प्रशांत जैन ने प्रतिनिधिमंडल के रूप में सहभागिता की और एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श किया।