अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, अब नहीं चलेगा ‘कंपाउंडिंग’ का खेल

सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माणों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि समय बीतने या अधिकारियों की लापरवाही के कारण कोई भी अवैध निर्माण वैध नहीं माना जा सकता। मेरठ मामले को पूरे देश के लिए “आई ओपनर” बताते हुए अदालत ने 21 सितंबर तक राज्यों और स्थानीय निकायों से रिपोर्ट मांगी है। इस फैसले का असर आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए), आवास विकास परिषद और शहर में चल रहे अवैध निर्माणों पर भी पड़ सकता है।

Jul 17, 2026 - 18:01
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अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, अब नहीं चलेगा ‘कंपाउंडिंग’ का खेल

मेरठ मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, 21 सितंबर तक राज्यों से मांगी रिपोर्ट, आगरा में एडीए और आवास विकास की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

आगरा। देशभर में अवैध निर्माण और उन्हें बाद में कंपाउंडिंग के जरिए वैध बनाने की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि समय बीत जाने या अधिकारियों की लापरवाही के आधार पर किसी भी अवैध निर्माण को वैध नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस मामले में सभी राज्यों और स्थानीय निकायों से 21 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती का असर आगरा में भी देखने को मिलेगा। 

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान इसे पूरे देश के लिए “आई ओपनर” करार देते हुए कहा कि अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद आगरा समेत उत्तर प्रदेश के कई शहरों में विकास प्राधिकरणों और नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।

अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि किसी भवन का वर्षों तक खड़ा रहना उसे कानूनी दर्जा नहीं दे सकता। यदि निर्माण नियमों के विपरीत हुआ है तो केवल इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती कि संबंधित अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अदालत ने कहा कि कंपाउंडिंग की व्यवस्था का इस्तेमाल नियमों के उल्लंघन को संरक्षण देने के लिए नहीं किया जा सकता। स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों की जिम्मेदारी है कि वे अवैध निर्माणों पर समय रहते कार्रवाई करें।

आगरा में बढ़ सकती है एडीए और आवास विकास की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का असर आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) और आवास विकास परिषद की कार्यप्रणाली पर भी पड़ सकता है। ताजनगरी में लंबे समय से कई इलाकों में बिना स्वीकृत नक्शों, मानकों के उल्लंघन और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े निर्माणों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहर के कई प्रमुख इलाकों में आवासीय भवनों को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जाने, अवैध कॉलोनियों के विस्तार और निर्माण मानकों की अनदेखी के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे मामलों में अक्सर कंपाउंडिंग को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।

टीटीजेड क्षेत्र में भी बढ़ सकती है निगरानी

आगरा ताजमहल और ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के दायरे में आता है। यहां निर्माण संबंधी नियम अन्य शहरों की तुलना में अधिक सख्त हैं। इसके बावजूद कई बार नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद एडीए, नगर निगम और आवास विकास परिषद को अवैध निर्माणों की निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया और तेज करनी पड़ सकती है। आने वाले समय में शहर में निर्माण गतिविधियों की जांच और सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।

स्थानीय निकायों को देनी होगी जवाबदेही

अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल भवन मालिक ही नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारी और संबंधित विभाग भी जवाबदेही से बच नहीं सकते। राज्यों और स्थानीय निकायों को यह बताना होगा कि अवैध निर्माण रोकने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद नगर नियोजन से जुड़े विभागों की कार्यप्रणाली पर अधिक निगरानी रहेगी और भविष्य में नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।